उत्तराखंड में पिछले 24 घंटों में कोरोना संक्रमण के 274 नए मामले दर्ज किए गए। वहीं 18 मरीजों की मौत हुई है। इसके अलावा 515 मरीजों को आज ठीक होने के बाद घर भेजा गया।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी बुलेटिन के अनुसार, सोमवार को 16180 सैंपलों की जांच रिपोर्ट निगेटिव आई है। वही, अल्मोड़ा में 24, बागेश्वर में 12, चमोली में 07, चंपावत में 10, देहरादून में 57, हरिद्वार में 48, नैनीताल में 26, पौड़ी में छह, पिथौरागढ़ में 18, रुद्रप्रयाग में सात, टिहरी में 16, ऊधमसिंह नगर में 17 और उत्तरकाशी में 26 मामले सामने आए हैं।
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प्रदेश में अब तक कोरोना के कुल मामलों की संख्या तीन लाख 37 हजार 449 हो गई है। इनमें से तीन लाख 21 हजार 64 लोग ठीक हो चुके हैं। वहीं, सक्रिय मामलों की संख्या घटकर 3642 पहुंच गई है। राज्य में कोरोना के चलते अब तक चुल 6985 लोगों की जान जा चुकी है।
कोरोना से बचे तो अब पोस्ट कोविड फ्राइब्रोसिस का खतरा
काफी जद्दोजहद के बाद कोरोना से उबरे मरीज कई मरीज अब सांस फूलने, जबरदस्त खांसी और थकान आदि समस्याओं से जूझ रहे हैं। चिकित्सकों के पास बड़ी संख्या में ऐसे मरीज पहुंचे रहे हैं। चिकित्सा विशेषज्ञ ऐसे मरीजों को रेस्पाइरेटरी (पल्मोनरी फंक्शन) टेस्ट दो माह बाद जरूर कराने की सलाह दे रहे हैं।
दून अस्पताल के वरिष्ठ पल्मोलॉजिस्ट डॉ. अंकित अग्रवाल के मुताबिक उनके पास तमाम ऐसे मरीज आ रहे हैं जो कोरोना बीमारी से ठीक होने के बाद जबरदस्त खांसी, सांस फूलने के साथ ही थकान की समस्या से जूझ रहे हैं। इस समस्या को पोस्ट कोविड फाइब्रोसिस भी कहा जाता है।
पोस्ट कोविड फाइब्रोसिस होने से मरीजों को सांस फूलने के साथ ही गंभीर खांसी और थकान की समस्याएं हो जाती हैं। डॉ. अंकित अग्रवाल के मुताबिक कोरोना से संक्रमित होने वाले ऐसे मरीज जिनके फेफड़े तक संक्रमण पहुंच गया था और फेफड़े को काफी नुकसान पहुंचा। ऐसे मरीजों को दो माह बाद कुशल विशेषज्ञों से पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट करा लेना चाहिए।
इससे कोरोना से फेफड़ों को हुए नुकसान का पता चल जाएगा और उचित समय पर इलाज संभव हो सकेगा। फेफड़े की ताकत बढ़ाने को लेकर तमाम दवाएं हैं। ऐसे में मरीजों को बहुत अधिक चिंता करने की भी जरूरत नहीं है।