वहीं एलोविरा की पत्तियों को छीलने के बाद जो लिसलिसा पदार्थ निकलता है वह भी सैनेटाइजर का काम करता है। गुलाब की पंखुडियों को भी सैनेटाइजर की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा उन्होंने बताया कि रिंगाल और बांस की पतली डाल से बनाया हुआ मास्क भी बाजार में बिकने वाले मास्क से किसी भी मायने में कम नहीं होता है।
कोरोना से निपटने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी एहतियात है। इसके साथ ही शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बेहतर होनी चाहिए। इसके लिए होम्योपैथी, आयुर्वेद और यूनानी पद्धति में कई दवाएं उपलब्ध हैं जो आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को काफी बढ़ा देंगी। इससे आप हर तरह की बीमारी से दूर रहेंगे।
डॉ. एनसी पांडे ने बताया कि आयुष मंत्रालय की ओर से जारी आदेशों के तहत आर्सेनिकल अल्बम -30 की गोलियां रोज सुबह खाली पेट लगातार तीन दिन लेने से रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी बेहतर हो जाती है।
वहीं जो लोग सर्दी और जुकाम से पीड़ित हैं उन्हें इसकी खुराक दो समय लेनी चाहिए। एक महीने बाद यह खुराक दोबारा दोहरानी चाहिए। इसके साथ साफ और सफाई का ध्यान जरूर रखें।
आयुर्वेद में बचाव के उपाय
अगस्त्य हरितकी पांच ग्राम, दिन में दो बार गर्म पानी के साथ लें। वहीं समशामणि वटी 500 मिलीग्राम दिन में दो बार लेने से भी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए त्रिकुट (पीपली, मरीच और शुंठी) पाउडर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
त्रिकुट पाउडर पांच ग्राम और तुलसी की तीन से पांच पत्तियों को एक लीटर पानी में उबाल लें, जब पानी आधा लीटर रह जाए तो इसे जरूरत के हिसाब से सेवन करें। वहीं ‘प्रतिमर्सा नस्य’ की दो बूंद सुबह उठकर नाक के दोनों छेदों में डालें।
यूनानी पद्धति में बचाव के उपाय
बेहिदाना : (सिदोनिया ओबलोंगा) 3 ग्राम, उनाब जिजिप्स 5 नग, सैपिस्तन 7 नग को 1 लीटर पानी में आधा होने तक उबालकर काढ़ा तैयार करें। इसे बोतल में भरकर आवश्यकता पड़ने पर धीरे-धीरे पीएं। वहीं शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए खमीरा मार्वेरीड तीन से पांच ग्राम रोजाना ले सकते हैं।