कोरोना की संभावित तीसरी लहर में बच्चों को संक्रमण से बचाव और उपचार के लिए स्वास्थ्य विभाग ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। कोविड महामारी में संक्रमितों को त्वरित उपचार के लिए 87 आपदा प्रभावित क्षेत्रों का चिन्हित किया गया। जहां पर सड़क मार्ग बाधित होने पर संक्रमितों को ट्रांसशिपमेंट के माध्यम से अस्पताल पहुंचाया जाएगा। वहीं, विभाग ने सीएचसी व पीएचसी स्तर पर बच्चों के लिए मेडिसिन और विटामिन होम आइसोलेशन किट तैयार की है। जिन्हें आशा वर्करों के माध्यम से घर-घर जाकर वितरित किया जाएगा।
बुधवार को स्वास्थ्य महानिदेशक डा. तृप्ति बहुगुणा ने कोरोना की तीसरी लहर तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि तीसरी लहर में बच्चों के अधिक संक्रमित होने की आशंका को देखते हुए विभाग ने मेडिसन व विटामिन सप्लीमेंट किट तैयार कर ली है। जिन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर होम आइसोलेशन किट के तौर पर दिया जाएगा।
यह किट बच्चों के आयु वर्ग अनुसार तीन अलग-अलग रंगों में तैयार की गई है। आशा कार्यकर्ता के माध्यम से घर-घर जाकर किटों का वितरण किया जाएगा। आशा अपने सामने विटामिन डी, जिंक, विटामिन सी की एक खुराक बच्चे को खिलाने का कार्य करेंगी।
महानिदेशक ने कहा कि तीसरी लहर में संक्रमित होने वाले बच्चों का आकलन किया गया। जिसमें मात्र पांच प्रतिशत बच्चों को ही अस्पताल ले जाने की आवश्यकता होगी। तीन प्रतिशत बच्चे आक्सीजन बेड, 2 प्रतिशत आईसीयू में भर्ती करने पड़ सकते हैं।
एनएचएम निदेशक डॉ. सरोज नैथानी ने बताया कि जिन माता-पिता के बच्चे 12 वर्ष से कम आयु के हैं, उन्हें प्राथमिकता के साथ कोविड वैक्सीनेशन किए जाने की कार्य योजना अमल में लाई जा रही है। इसके लिए बच्चों को न्यूमोकोकल वैक्सीन लगाने की सलाह दी जा रही है।
संक्रमित बच्चों के 694 बेड की होगी जरूरत
विभाग ने आकलन किया है कि तीसरी लहर में संक्रमित बच्चों के लिए 694 बेड की आवश्यकता होगी। जिसके सापेक्ष 1446 ऑक्सीजन युक्त बेड उपलब्ध हैं। इसी प्रकार 277 आईसीयू की जगह सरकारी, प्राइवेट अस्पतालों व मेडिकल कॉलेजों को मिलाकर 1889 आईसीयू उपलब्ध हैं।
बच्चों की देखभाल के लिए सरकारी और निजी अस्पतालों में 432 नियोनेटल आईसीयू, 383 पिडियाट्रिक आईसीयू उपलब्ध हैं। बेड के अनुसार सरकारी व निजी अस्पतालों में 184 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की आवश्यकता होगी। जबकि केंद्र सरकार ने 200 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की आपूर्ति उत्तराखंड के लिए निर्धारित की हैं। 108 आपातकालीन सेवा के 20 प्रतिशत एंबुलेंस सिर्फ पिडियाट्रिक एंबुलेंस के तौर पर काम करेंगे।