लॉकडाउन के बाद गढ़वाल के प्रवेश द्वार कोटद्वार में कागज का कारोबार मंदी की मार झेल रहा है। डिमांड कम होने कारण पूरा कागज का कारोबार एकदम ठप हो गया है। जिससे थोक विक्रेताओं को रेट कम करने पड़ रहे हैं।
कोटद्वार के थोक कागज विक्रेता राजेश भाटिया बताते हैं कि बाजार में उनके कारोबार की डिमांड ही खत्म हो गई है। यही हाल रहा तो आने वाले महीने में और दिक्कत झेलनी पड़ सकती है। स्कूल कालेज बंद होने से भी कापी किताबों का कारोबार 80 फीसदी प्रभावित हो गया है।
घनश्याम बुक डिपो के स्वामी सुमन नैथानी का कहना है कि दिल्ली समेत पूरे उत्तर भारत में सामान्य आवाजाही और सुगम परिवहन व्यवस्था होने तक सभी उद्योग और कारोबार प्रभावित रहेंगे।
स्टेशनरी बनाने वाली छोटी इकाइयां हुई बंद
हरिद्वार में स्कूल-कॉलेजों के बंद होने से स्टेशनरी की डिमांड नहीं होने से कागज उद्योग से जुड़ी छोटी इकाइयां बंद हो गई है। जो स्टेशनरी तैयार भी कर रहे हैं, उनका सामान बाजार में बिक नहीं रहा है। ऐसे में हरिद्वार के कारोबारियों को करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ा है।
हरिद्वार में करीब 50 लघु उद्योग स्टेशनरी तैयार करते हैं। इस कारोबार से जुड़ी शहर में करीब 30 बड़ी दुकानें हैं। सौ दुकानें छोटे स्तर पर बिक्री करती है, लेकिन लॉकडाउन होने से स्कूल-कॉलेज नहीं खुले। अप्रैल में बड़े स्तर पर बिक्री भी होती थी, लेकिन इस बार चार महीने से कागज उद्योग से जुड़े कारोबारी खाली बैठे हैं।
जून महीने में कुछ स्तर पर बिक्री हुई, लेकिन पूरी तरह से बिक्री न होने पर लघु उद्योग बंद हो गए। कारोबारी संजीव मेहता, राजीव भार्गव का कहना है कि बाजार में डिमांड शून्य है, ऐसे में कारोबार से जुड़े लोग खाली बैठे हैं। गोदाम पहले से ही फुुल हैं। अब कुछ ने मास्क और सैनिटाइजर बेचने का काम कर लिया है। उनकी राज्य सरकार से मांग है कि लघु उद्योगों के संचालकों और उनसे जुड़े व्यापारियों की आर्थिक मदद की जाए।
लॉकडाउन के कारण स्कूल, कालेज अन्य शिक्षण संस्थान पूरी तरह से बंद हैं, जिससे पेपर मिलों का कारोबार प्रभावित हुआ है। कागज की मांग कम होने के कारण पेपर मिलों में क्षमता से कम उत्पादन हो रहा है। केंद्र सरकार ने बैंक लिमिट का 20 प्रतिशत पैसा बिना गारंटी के देने को कहा है, लेकिन बैंकों से आसानी से पैसा नहीं मिल रहा है। सरकार को इसे और आसान बनाना होगा।
- अनिल तनेजा, निदेशक, पीएचडी चैंबर्स आफ कामर्स इंडस्ट्री