कोरोना के जो गंभीर मरीज आ रहे हैं, उन्हें अन्य बीमारियां भी हो रही हैं। लिहाजा उन्हें आईसीयू में भर्ती कर इलाज करना पड़ रहा है। जरूरत पड़ने पर ऑक्सीजन भी दी जाती है। अगर निमोनिया है तो रेमडेसिविर इंजेक्शन भी लगाना पड़ता है।
कोरोना संक्रमितों की संख्या में बढ़ोतरी के साथ ही एक बार फिर रेमडेसिविर इंजेक्शन की जरूरत पड़ने लगी है। आईसीयू में भर्ती कई गंभीर मरीजों को यह इंजेक्शन लगाना पड़ रहा है। फिलहाल, दून अस्पताल में यह इंजेक्शन निशुल्क उपलब्ध है।
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दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कोविड के नोडल अधिकारी डॉ. अनुराग अग्रवाल ने बताया कि कोरोना के जो गंभीर मरीज आ रहे हैं, उन्हें अन्य बीमारियां भी हो रही हैं। लिहाजा उन्हें आईसीयू में भर्ती कर इलाज करना पड़ रहा है। जरूरत पड़ने पर ऑक्सीजन भी दी जाती है। अगर निमोनिया है तो रेमडेसिविर इंजेक्शन भी लगाना पड़ता है। यह मरीज की स्थिति पर निर्भर करता है।
अगर इंजेक्शन दिया गया तो फिर डोज पूरी की जाती है। दून मेडिकल कॉलेज की लैब की रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोना मरीजों में डेल्टा नहीं ओमिक्रॉन वेरिएंट ही मिल रहा है। बता दें कि कोरोना की दूसरी लहर 2021 में आई थी। तब रेमडेसिविर इंजेक्शन की मांग तेजी से बढ़ी थी। इंजेक्शन कहीं मिल ही नहीं रहा था और इसकी कीमत लाखों में पहुंच गई थी। इंजेक्शन को ब्लैक में भी बेचा गया था।
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पांच डोज की जरूरत
डॉ. अनुराग ने बताया कि रेमडेसिविर की पांच डोज लगती है। पहले दिन दो और इसके बाद एक-एक दिन पर एक डोज दी जाती है। बाजार में इसकी कीमत तीन से चार हजार रुपये है। अस्पताल में निशुल्क उपलब्ध है।
रोजाना करीब ढाई सौ जांच
सीएमओ डॉ. संजय जैन ने बताया कि देहरादून जिले में इस समय रोजाना करीब 250 लोगों की कोरोना जांच हो रही है। अगर मरीजों की संख्या अधिक होती है और शासन से जांच बढ़ाने निर्देश मिले तो उस पर अमल होगा।
ज्यादातर बुजुर्ग हो रही भर्ती
स्वास्थ विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, बीते बुधवार, शुक्रवार और शनिवार को कोरोना के तीन मरीजों की मौत हुई है। सभी मरीज दून अस्पताल में भर्ती थे। डॉ. अनुराग के मुताबिक अस्पताल में जो मरीज भर्ती हो रहे हैं, उनकी उम्र 60 वर्ष से अधिक है।