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लॉकडाउन के पांच माह: कहीं खुले ताले तो कहीं कोरोना की बंदिशें, सरकारी दफ्तरों में रफ्तार नहीं पकड़ पाया काम

Tue, 25 Aug 2020 02:20 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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दफ्तरों में पुरानी रौनक नहीं लौटी - फोटो : amar ujala
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कोरोना लॉकडाउन को पांच माह बीत चुके हैं। पहले लॉकडाउन और इसके बाद अब अनलॉक का भी तीसरे चरण है, लेकिन दफ्तरों में पुरानी रौनक नहीं लौटी है। कहीं, सोशल डिस्टेसिंग के बीच सीमित काम हो रहा है तो कहीं कई काम अब भी शुरू नहीं हो पाए हैं। अमर उजाला के छह रिपोर्टरों ने छह अलग-अलग कार्यालयों में कार्यों का हाल जाना।

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कलेक्ट्रेट: टोकन के जरिए मिल रहे सीमित प्रमाणपत्र

कलेक्ट्रेट स्थित जनाधार केंद्र खोल दिया गया है, लेकिन अभी यहां टोकन के जरिये ही काम हो रहा है। हालांकि, कंटेनमेंट जोन के लोगों को अभी केंद्र में आने की अनुमति नहीं है। कोरोना काल से पहले सुबह 10 से शाम पांच बजे तक प्रमाण पत्र बनाए जाते थे। लेकिन, अब संख्या सीमित होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा स्थानीय अदालतें भी सोमवार से खोल दी गई हैं। लेकिन, मसूरी में अतिक्रमण हटाओ अभियान के चलते एसडीएम, एडीएम प्रशासन आदि कोर्ट में नहीं बैठे।

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नगर निगम: टोकन लेकर ही जमा करा सकते हैं हाउस टैक्स

नगर निगम में कोरोना काल से पहले हाउस टैक्स जमा कराने वालों के लिए कोई सीमा तय नहीं थीं। लेकिन अनलॉक शुरू होने के बाद से यहां प्रतिदिन 100 टोकन की सीमा है। यानी केवल 100 लोग ही हाउस टैक्स जमा करा सकते हैं। हालांकि निगम की सफाई व्यवस्था पर इसका कोई असर नहीं पड़ा है। कोरोना काल के चलते इस बार नगर निगम प्रशासन हाउस टैक्स के लिए रखे गए लक्ष्य को हासिल नहीं कर सका। अनलॉक में लोगों को पिछले वित्तीय वर्ष का हाउस टैक्स जमा करने पर 20 प्रतिशत की छूट भी दी गई। लेकिन, लोगों ने टैक्स जमा कराने में रुचि नहीं दिखाई। इसी तरह जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र भी टोकन के जरिये ही जारी किए जा रहे हैं।

आरटीओ: अभी तक केवल 30 प्रतिशत काम ही हो रहा

परिवहन विभाग कार्यालय में अभी महज तीस फीसद काम हो रहा है। ड्राइविंग लाइसेंस के साथ ही गाड़ियों के परमिट, टैक्स जमा कराने और फिटनेस जांच का कोटा निर्धारित है। फिलहाल आरटीओ में 70 ड्राइविंग लाइसेंस का नवीनीकरण कराने के साथ ही 20 नए लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस, 25 गाड़ियों के परमिट और 20 गाड़ियों के फिटनेस की जांच हो रही है।

आरटीओ डीसी पठाई ने बताया कि ऐसी महिला कर्मचारी जिनके 10 साल से कम उम्र के बच्चे हैं और 55 साल से अधिक उम्र वाले कर्मचारियों को दफ्तर नहीं बुलाया जा रहा है। ऐसे में 50 फीसदी कर्मचारी ही ड्यूटी पर आ रहे हैं। आरटीओ में कई पटल खोले गए थे, लेकिन कर्मचारियों की कमी के चलते कुछ को बंद करना पड़ रहा है। आरटीओ डीसी पठाई ने बताया कि कोरोना संकट से पहले कार्यालय में प्रतिदिन औसतन 15 सौ वाहन स्वामियों के कामकाज निपटाए जाते थे। लेकिन अब इनकी संख्या बेहद सीमित कर दी गई है। 

ऊर्जा विभाग: पटरी पर आने लगी व्यवस्था

लॉकडाउन के बाद अनलॉक शुरू होने के बाद से ही ऊर्जा विभाग में बिलिंग, मीटरिंग से लेकर तमाम कार्य शुरू हो चुके हैं। सभी बिलिंग सेंटरों को पूरी तरह से खोल दिया गया है। हालांकि, बिलिंग सेंटरों में अतिरिक्त सावधानियां बरती जा रही है। लोगों को सैनिटाइज किया जा रहा है। साथ ही हर बिलिंग सेंटर पर लोगों का तापमान अनिवार्य रूप से लिया जाता है। 
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कचहरी: रोस्टरवार खुल रहे हैं कोर्ट

लॉकडाउन के बाद से कोर्ट में व्यवस्थाएं पूरी तरह से सुचारू नहीं हो पाई हैं। सेशन और मजिस्ट्रेट कोर्ट में अलग अलग रोस्टर जारी हैं। ज्यादातर मामले ऑनलाइन सुने जा रहे हैं। इनमें भी अधिकतर जमानत अर्जियां ही सुनी जा रही हैं।

हालांकि, रोस्टरवार न्यायालय में वहां चल रहे मामलों की सुनवाई भी हो रही है। कचहरी परिसर में भी वकीलों की संख्या एक तिहाई से कम रह गई है। वकील भी अपने जरूरी काम निपटाने के बाद तत्काल लौट जाते हैं। कचहरी परिसर में आने-जाने के रास्ते अभी भी सीमित हैं।

एसएसपी कार्यालय: फरियादियों के लिए अलग टेबल

एसएसपी कार्यालय में भी व्यवस्थाएं पूरी तरह से सुचारु नहीं हो पाई हैं। यहां पहले फरियादी ऊपर के तल पर जाकर शिकायतें दर्ज कराते थे। कोरोना की वजह से उनके लिए ग्राउंड फ्लोर पर ही टेबल लगाई गई है।

हर आने वाले फरियादी को पहले सैनिटाइज किया जाता है, इसके बाद ही जरूरी होने पर ऊपर जाने की अनुमति मिलती है। हालांकि डीआईजी अरुण मोहन जोशी निर्धारित समय में फरियादियों से मुलाकात कर रहे हैं। थानों में भी इसी तरह गेट पर टेबल लगाए गए हैं। कोरोना संकट के चलते पुलिस भी पूरी सावधानी के साथ काम कर रही है।
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