भाजपा में वापसी करने से पहले खानपुर विधायक कुंवर प्रणव चैंपियन ने मुख्यमंत्री के दरबार में हाजिरी लगाई। वह प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बंशीधर भगत के साथ मुख्यमंत्री से मिले। इस बारे में जब पूछा गया तो मुख्यमंत्री ने कहा कि चैंपियन अपनी विधानसभा के कार्यों को लेकर मिले थे।
सूत्रों के मुताबिक, पार्टी से निष्कासित होने के बाद से ही प्रणव चैंपियन मुख्यमंत्री से मिलने के लिए चक्कर लगा रहे थे। लेकिन उन्हें खास तरजीह नहीं मिल रही थी। पूरे एक साल का वनवास भोगने के बाद जब चैंपियन के आचरण की देख परख हो गई तब जाकर उन्हें पार्टी में लाने का विचार बना। कोर ग्रुप की बैठक में भी अधिकांश सदस्यों ने उनकी वापसी के प्रस्ताव पर हामी भरी थी।
हालांकि राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी चैंपियन की वापसी के पक्ष में नहीं माने जा रहे थे। उनकी नाराजगी को लेकर सोशल मीडिया में खबरें भी पहुंची। बलूनी की नाराजगी राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा तक पहुंच गई थी। लेकिन कोर ग्रुप के फैसले के आगे बलूनी की नाराजगी असरदार नहीं हो पाई। चैंपियन की वापसी तय हो जाने के बाद वह सुबह प्रदेश अध्यक्ष के साथ मुख्यमंत्री के आवास में पहुंचे जहां उन्होंने उनसे शिष्टाचार भेंट की।
कुमाऊं के एक विधायक व नेता भी विरोध में
पार्टी से जुड़े सूत्रों की मानें तो विधायक कुंवर प्रणव चैंपियन के विरोध में कुमाऊं के एक वरिष्ठ भाजपा विधायक व एक वरिष्ठ नेता भी विरोध में थे। दोनों ने प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत से अपना विरोध दर्ज करा दिया था।
इसलिए जरूरी हैं चैंपियन
हरिद्वार में क्षेत्रीय व जातीय समीकरणों को साधने के लिए भाजपा को चैंपियन की जरूरत है। दिसंबर में हरिद्वार में पंचायत चुनाव हैं और खुद चैंपियन दावा कर रहे हैं जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी भाजपा को उनके समर्थन से मिली। खानपुर विधानसभा में भाजपा के पास चैंपियन का कोई विकल्प नहीं हैं। सियासी जानकारों का मानना है कि जातीय समीकरणों को साधने के लिए पार्टी को चैंपियन के लिए दरवाजे खोलने पड़े।