वन अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच मिलीभगत का संकेत
रिपोर्ट में कहा गया है कि कॉर्बेट में सनेह से पाखरो तक 550.33 लाख रुपये की अनुमानित लागत से 18.5 किमी की एक विद्युत लाइन (11 केवी) बिछाई गई थी, जो वन संरक्षण अधिनियम के तहत बिना पूर्व मंजूरी के निविदा आमंत्रित की थी।
रिपोर्ट में उत्तराखंड खरीद नियम 2017, उत्तराखंड बजट मैनुअल नियम, राज्य पीडब्ल्यूडी नियमों और विनियमित के पालन में उल्लंघन और अनियमितताओं का भी जिक्र किया गया है। रिपोर्ट में प्रभागीय वन अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच मिलीभगत का संकेत भी दिया गया है।
इस मामले में वकील और वन्यजीव कार्यकर्ता गौरव बंसल ने सीटीआर में अवैध निर्माण, पेड़ों की कटाई और संपर्क सड़कों के निर्माण के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने कहा कि ऑडिट रिपोर्ट से स्पष्ट है कि सीटीआर के भीतर बाघ संरक्षण और बाघ सफारी के नाम पर तत्कालीन मंत्री ने और वरिष्ठ अधिकारियों ने योजनाबद्ध तरीके से जनता के पैसे का बड़े पैमाने पर गबन किया है।
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इस मामले में उत्तराखंड के प्रधान महालेखाकार ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट शासन को सौंपी है। उन्होंने इस पर शासन का पक्ष जानना चाहा है। रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद शासन अपना कमेंट लिखकर देगा। इसके बाद फाइनल रिपोर्ट सामने आएगी। - आरके सुधांशु, प्रमुख सचिव वन एवं पर्यावरण