वन्यजीवों का जीवन खतरे में डाल रहे
बताते चलें कि रिजर्व के आसपास के क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ने के बाद से वन्यजीव प्रेमी लगातार विरोध कर रहे हैं। मामले में पहले भी शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं। वन्यजीव प्रेमियों का मानना है कि कुछ लोग अधिक मुनाफे के चक्कर में वन्यजीवों का जीवन खतरे में डाल रहे हैं।
ईको सेंसिटिव जोन एरिया को एनटीसीए की गाइडलाइन के अनुसार ही तैयार किया जा रहा है। एनटीसीए की ओर से भेजे गए नोटिस का परीक्षण के बाद जवाब दिया जाएगा। बफर जोन वाइल्ड लाइफ एक्ट में एक विधिक शब्द है। उसकी परिभाषा प्रख्यापित है। कॉर्बेट के बफर जोन में कोई भी रिजॉर्ट या निजी संपत्ति नहीं है। जो भी वहां पर रिजॉर्ट या भवन बने हैं, वह निजी भूमि पर बने हैं। वह बफर जोन का हिस्सा नहीं हैं।
- डॉ. समीर सिन्हा, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक
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एनटीसीए का जो भी निर्णय होगा, उसका परीक्षण कराया जाएगा। वन क्षेत्र की परिधि में किसी भी तरह के अतिक्रमण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने बफर जोन के एक किमी के दायरे में किसी भी प्रकार के निर्माण पर रोक लगाई है। इससे उत्तराखंड सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा। मसले पर केंद्र सरकार एसएलपी दायर कर चुकी है, जबकि राज्य सरकार भी एसएलपी दाखिल करने जा रही है।
- सुबोध उनियाल, वन मंत्री