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40 साल बाद खुला कार्बेट पार्क में गश्त का रास्ता

Sat, 22 Apr 2017 12:11 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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पिछले साल कार्बेट पार्क के जिस इलाके में बाघों के शिकार की बात कही जा रही थी, उस दुर्गम इलाके में वन विभाग सड़क खोलने में सफल हो गया है। अफसरों का दावा है कि 40 साल बाद यह मार्ग खुल सका है। इसके अलावा कार्बेट पार्क के कोर जोन में भी नया रास्ता तैयार किया गया है।
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मार्च 2016 में हरिद्वार के पास एक शिकारी से बाघों की कई खाल बरामद की गई थी। जिन बाघों की खाल बरामद हुई थी, वे कार्बेट पार्क के थे। माना जा रहा था कि शिकारी ने कार्बेट पार्क के हथनी कुंड जैसे इलाके में बाघों को मारा किया था। इसके बाद वन विभाग की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठे थे। अब वन विभाग ने दुर्गम इलाकों में पहुंच और गश्त बढ़ाने के लिए बंद रास्तों को खोलना शुरू किया है।

कार्बेट पार्क के कोर जोन में 2010 की बाढ़ में कांडा- ढिकाला मार्ग क्षतिग्रस्त हो गया था। करीब सात साल से यह रास्ता बंद पड़ा था। अब वन विभाग ने 12 किमी का वैकल्पिक रास्ता ढिकाला- फुलईचौड़ से मगनू खाल तक तैयार किया है। इसी तरह सबसे संवेदनशील इलाका कांडी खाल से हाथी कुंड का रास्ता बंद पड़ा था, इस रास्ते को तैयार कर लिया गया है।
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प्रमुख वन संरक्षक वन्य जीव डीबीएस खाती कहते हैं कि हल्दूपड़ाव- कांडीखाल और कांडी खाल से हाथी कुंड तक रास्ता तैयार हो गया है। करीब 25 किमी रास्ता तैयार होने से बेहतर गश्त होने साथ टीमों का मूवमेंट तेज हो सकेगा। कांडी खाल से हाथी कुंड का रास्ता करीब 40 साल बाद खुला है।

यह एक बड़ी उपलब्धि है। कार्बेट पार्क उप निदेशक अमित वर्मा कहते हैं कि सोना नदी रेंज और सलेन रेंज की टीम संयुक्त रूप से गश्त कर सकेंगी। इसके अलावा लैंसडौन वन प्रभाग तक आवागमन और सहज और छोटा हो गया है। इससे भी चौकसी आदि में मदद मिलेगी।
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