रिपोर्ट में कहा गया है कि अधिकारी नियमों और विनियमों का पूरी तरह से उल्लंघन करते हुए हर संभव तरीके से काम करवाने में अति कर रहे थे। ऐसे अधिकारियों और व्यक्तियों के खिलाफ अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की जानी की संस्तुति की गई है। खास बात यह है कि इस रिपोर्ट में तत्कालीन प्रमुख वन संरक्षक (हॉफ) और तत्कालीन पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ का कहीं जिक्र नहीं किया गया है। बताते चलें कि इस मामले को सुप्रीम कोर्ट के वकील गौरव बंसल ने पहली बार दिल्ली हाईकोर्ट में उठाया था। इसके बाद एनजीटी ने इसका स्वतः संज्ञान लिया था।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट सुनवाई शुरू कर चुका है। अब इस रिपोर्ट का कोई मायने नहीं है। पाखरो परियोजना गढ़वाल के विकास के लिहाज से बहुत अच्छी योजना थी। कुछ लोगों ने इसे वेबजह मुद्दा बना दिया है। प्रोजेक्ट की सभी मंजूरियां नियमों के तहत ही दी गई हैं।
-डा. हरक सिंह, तत्कालीन वन मंत्री