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धूम्रपान और प्रदूषण के कारण बढ़ रहा सीओपीडी

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देहरादून। मैक्स हॉस्पिटल में पल्मोनोलॉजिस्ट ने क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) के बारे में जागरूकता के लिए आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में फेफड़ों से जुड़ी समस्याएं और जानकारियां साझी की गईं। विशेषज्ञों ने विषाक्त कणों, धूम्रपान और प्रदूषण के प्रभाव से बढ़ते श्वसन रोग की बचाव की जानकारी भी दी।
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पल्मोनोलॉजी विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. पुनीत त्यागी के अनुसार बहुत से लोग सांस की तकलीफ बढ़ने और खांसी को उम्र बढ़ने का सामान्य हिस्सा मानते हैं। हो सकता है कि रोग के प्रारंभिक चरण में कोई भी लक्षण न दिखे। वर्षों तक सांस की कमी के बिना भी सीओपीडी विकसित हो सकता है। लोगों को अक्सर अधिक विकसित चरणों में लक्षण दिखते हैं। सीओपीडी फेफड़ों की बीमारी का एक प्रगतिशील रूप है। जो हल्के से लेकर गंभीर स्तर तक हो सकता है। सीओपीडी में फेफड़ों में हवा का आना-जाना बंद होने लगता है और सांस लेना मुश्किल हो जाता है। इसका पता स्पईरोमेट्री द्वारा लगाया जाता है जो की मैक्स अस्पताल में उपलब्ध है। इस मौके पर वाइस प्रेसिडेंट, ऑपरेशंस और यूनिट हेड. डॉ. संदीप सिंह तंवर ने कहा कि मैक्स देहरादून राज्य में सबसे अच्छी चिकित्सा प्रौद्योगिकी लाने में सबसे आगे रहा है। इसी को जारी रखते हुए इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी की शुरुआत की है।
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