गंगा में खनन को लेकर शासनादेश के मामले में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत सहित सरकार के तीन आला अफसरों के खिलाफ प्रकीर्ण वाद दर्ज किया गया है।
मातृसदन ने शासनादेश के फर्जीवाड़े का आरोप लगाते हुए सीजेएम कोर्ट में शिकायत की थी। कोर्ट ने सुनवाई करते हुए पूर्व सीएम हरीश रावत, मुख्य सचिव एस रामास्वामी, औद्योगिक सचिव शैलेश बगोली और अपर सचिव विनय शंकर पांडेय के खिलाफ प्रकीर्ण वाद दर्ज किया है।
तत्कालीन कांग्रेस सरकार के समय बीते 15 नवंबर को एक शासनादेश जारी किया गया था। जिसमें रायवाला से भोगपुर तक गंगा में खनन खोल दिया गया था। इस शासनादेश की भाषा भी आम शासनादेश जैसी थी। जिसमें कहा गया था कि इसे राज्यपाल सहर्ष स्वीकृति प्रदान करते हैं।
मातृसदन ने सूचना के अधिकार में राजभवन से इस शासनादेश की बाबत जानकारी मांगी थी। मगर राजभवन ने इस शासनादेश की जानकारी होने से ही इनकार कर दिया था। मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद महाराज ने शासनादेश के फर्जीवाड़े का आरोप लगाया था।
ब्रह्मचारी दयानंद की ओर से सीजेएम कोर्ट में शिकायत भी की गई थी। मातृसदन के अधिवक्ता अरुण कुमार भदौरिया ने बताया ब्रह्मचारी दयानंद की शिकायत पर सुनवाई करते हुए सीजेएम कोर्ट ने पूर्व सीएम हरीश रावत, मुख्य सचिव एस रामास्वामी, औद्योगिक सचिव शैलेश बगोली, अपर सचिव विनय शंकर पांडेय के खिलाफ प्रकीर्ण दर्ज कर लिया। कोर्ट में ही मामले की सुनवाई चलेगी।