उत्तराखंड की देवभूमि में एक ग्रामीण तो क्या भिखारी भी भूख से नहीं मर सकता था, फिर भी खजुरानी गांव में पूरे परिवार की अपंगता के कारण भोजन के अभाव में एक किशोरी की मौत हो गई। इस घटना से प्रशासन के साथ ही उत्तराखंडी जनमानस भी स्तब्ध है।
सोमवार को विधायक और एसडीएम गांव पहुंचे। एसडीएम ने पीड़ित परिवार के लिए मुफ्त राशन की व्यवस्था की और परिवार के सदस्यों की पेंशन लगवाने का आश्वासन दिया तो विधायक ने भी हरसंभव मदद करने की बात कही। पूर्व विधायक ने भी हर महीने अपनी तरफ से पांच हजार रुपये देने की बात कही है।
ग्राम पंचायत खजुरानी में पूर्व फौजी स्वर्गीय लालसिंह का करीब-करीब पूरा परिवार न्यूरो मस्कुलर स्पार्म (तंतु, पेशियों का समन्वय न होना) नामक बीमारी से पीड़ित है। इसी रोग की चपेट में आने से स्व. लाल सिंह की पत्नी, बड़े बेटे के बाद अब गत दिवस 17 साल की पोती सरिता की भी मौत हो चुकी है।
बहू जानकी को छोड़कर परिवार के बाकी सदस्य भी दिव्यांग हैं। अकेली जानकी ही किसी तरह परिवार का पालन पोषण कर रही हैं। परिवार वालों के अनुसार जानकी खाना बनाकर खेतों में काम करने जाती थीं, पीछे परिवार के लोग जरूरत अनुसार भोजन करते थे। कुछ दिनों से सरिता ने भोजन नहीं किया था, जिसका पता जानकी को नहीं था।
सरिता की मौत की सूचना पर सोमवार को क्षेत्रीय विधायक महेश नेगी, एसडीएम गौरव चटवाल, तहसीलदार ओमवीर सिंह आदि ने खजुरानी पहुंचकर प्रभावित परिवार से मामले की जानकारी ली। परिवार की मुखिया जानकी ने बताया कि छह माह पूर्व ससुर की मौत के बाद उनके सामने गंभीर आर्थिक समस्या पैदा हो गई। इसके चलते वह दिव्यांग परिवार के पर्याप्त भोजन की व्यवस्था नहीं कर पा रही है।
दिव्यांगता की बीमारी से ग्रस्त सरिता को आवश्यकतानुसार भोजन न मिलने से ही उसकी मौत हो गई। एसडीएम ने गांव की राशन की दुकान से परिवार को मुफ्त में राशन देने के निर्देश दिए। परिवार के छूटे सदस्यों की पेंशन आदि के लिए भी त्वरित कार्रवाई करने की बात कही गई। विधायक महेश नेगी ने अपनी ओर से हरसंभव मदद का आश्वासन देते हुए कहा कि परिवार की सभी समस्याओं का शीघ्र समाधान होगा। उधर, पूर्व विधायक मदन सिंह बिष्ट ने प्रदेश सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए पीड़ित परिवार को हर महीने पांच हजार रुपये की मदद देने की बात कही है।
अमर उजाला ने तीन साल पहले ही कर दिया था आगाह
क्षेत्र के सबसे दूरस्थ गांव खजुरानी के पूर्व फौजी स्व. लाल सिंह की पोती सरिता की मौत का कारण न्यूरो मस्कुलर स्पार्म बीमारी और उससे पैदा हुई अभाव भरी परिस्थितियां हैं। परिवार में कुल तीन सदस्यों की मौत हो चुकी है जबकि छह से भी अधिक दिव्यांग हैं। इसको लेकर अमर उजाला ने ठीक तीन साल पहले आगाह भी कर दिया था। 22 अप्रैल 2014 के अंक में वंश बचाने की जंग लड़ रहा देश का बहादुर फौजी शीर्षक से खबर छपने और परिवार की सहायता की अपील करने के बाद पूर्व फौजी के खाते में लोगों ने एक लाख रुपये से भी अधिक की सहायता राशि जमा कराई थी। सियासतदानों और शासन-प्रशासन ने तब इसे गंभीरता से लिया होता तो शायद सरिता को अकाल मौत नहीं मरना पड़ता।