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संकट में रमसा के 1863 ठेका कर्मचारी

Fri, 27 Mar 2015 01:21 PM IST
बिशन सिंह बोरा/ अमर उजाला, देहरादून
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31 मार्च से सेवा समाप्ति का आदेश जारी होने के बाद राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (रमसा) के तहत ठेके पर नियुक्त प्रयोगशाला और कार्यालय सहायकों की मानो दुनिया लुट गई है।
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उनके परिवार इसी नौकरी के सहारे चल रहे थे। केंद्र सरकार की ओर से अनुदान बंद होने के कारण तीन साल की सेवा के बाद बेरोजगार होने जा रहे 1863 कर्मचारियों को अब बूढ़े मां-बाप और बच्चों की चिंता खाये जा रही है।

मन में एक ही सवाल है, अब क्या होगा, कैसे होगा? हालांकि, उनके लिए शिक्षामंत्री का रुख कुछ राहत देने वाला जरूर है। उन्होंने मामले को कैबिनेट में लाने का वादा किया है।
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केस 1: दून के हाईस्कूल भीमावाला में लैब सहायक के पद पर कार्यरत भावेश जगुड़ी बताते हैं कि उनके पिता नहीं हैं। मां, पत्नी और दो छोटी बेटियां श्रेया व प्रर्णिता किराए के कमरे में रह रहे हैं। सेवा समाप्त कर दी गई तो 31 मार्च के बाद कहा जाएंगे पता नहीं।

केस 2 : राष्ट्रीय उच्च माध्यमिक विद्यालय कोट फुलवाड़ी बागेश्वर के प्रकाश उपाध्याय भी अपने परिवार को लेकर चिंतित हैं। वे बताते हैं घर से 50 किलोमीटर दूर विद्यालय के पास ही बच्चों के साथ किराये पर रह रहे थे। छोटा भाई बेरोजगार है, बहन की शादी होनी है, कैसे होगा पता नहीं।

केस 3: राजकीय इंटर कालेज चंद्रेश्वर टिहरी गढ़वाली में लैब सहायक सोहन सिंह बागड़ी बताते हैं कि उनके पिता नहीं है। पूरा परिवार उन्हीं के भरोसे है। 31 मार्च के बाद क्या होगा यह सोचकर परेशान हैं।

इस मामले में प्रदेश सरकार का पक्ष रखने के लिए शिक्षा महानिदेशक को दिल्ली भेजा गया है। यदि केंद्र सरकार अब भी उनका मानदेय नहीं देती तो प्रदेश सरकार खर्च वहन करेगी। इस संबंध में कैबिनेट की बैठक में प्रस्ताव लाया जाएगा।
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- मंत्री प्रसाद नैथानी, शिक्षा मंत्री
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