ऐसे कई उदाहरण हैं, जब रात के अंधेरे में एमडीडीए के आदेश को धाता बताकर लोगों ने अवैध निर्माण करा दिया। निर्माण होने के बाद ऐसे लोगों पर कोई कार्रवाई भी नहीं हुई।
ऐसे हालात में एमडीडीए और पुलिस की भूमिका सवालों के घेरे में हैं। कई मामलों में दोनों विभागों के कर्मचारियों की संलिप्तता की बात भी सामने आई है। हालांकि अधिकारी अब सीलिंग की कार्रवाई की बात कर रहे हैं।
राजधानी के तमाम इलाकों में इन दिनों बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण चल रहा है। अवैध निर्माण करने वाले दिन के बजाय रात में काम करने में ज्यादा दिलचस्पी ले रहे हैं। इसमें व्यावसायिक और आवासीय सभी तरह के निर्माण शामिल हैं। विशेषकर कॉलोनी और आबादी के बीच में चल रहे ज्यादातर अवैध निर्माण रात को ही हो रहे हैं।
इस मामले में एमडीडीए और पुलिस पर भी अंगुली उठ रही है। बताया जा रहा है कि एमडीडीए के कई अधिकारी और कर्मचारी खुद ही अवैध निर्माण करने वालों को रात में निर्माण करने का सुझाव दे रहे हैं। इसके एवज में वह मोटी रकम वसूल रहे हैं। पुलिस भी अपनी जेब गर्म कर अवैध निर्माण से आंखें फेर लेती है। जिसका फायदा उठाते हुए रातोरात अवैध निर्माण खड़े किए जा रहे हैं।
केस: एक
गुरु रोड निवासी हरजिंदर सिंह और अरुण बनौट के घर के पास एक अवैध निर्माण चल रहा है। एमडीडीए और पुलिस को कई बार शिकायत करने के बाद निर्माण कार्य जारी रहा। कुछ दिन पहले मकान पर लेंटर डालने की तैयारी हुई तो लोगों ने फिर एमडीडीए और पुलिस से शिकायत की। एमडीडीए ने पुलिस को निर्माण कार्य पर रोक लगाने के निर्देश दिए। इसके बावजूद रविवार रात मकान पर लेंटर पड़ गया।
केस: दो
बंजारावाला निवासी रमेश सिंह ने अपने घर के पास अनाधिकृत रूप से किए जा रहे व्यावसायिक निर्माण की शिकायत एमडीडीए से की। एमडीडीए अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर काम रोकने के निर्देश दिए। कुछ दिन तक भीतर चुपचाप निर्माण कार्य चलता रहा। करीब एक हफ्ते बाद ऊपरी मंजिल पर निर्माण शुरू हो गया। दोबारा शिकायत करने पर निर्माणकर्ता ने रातों-रात दीवार खड़ी करवा दी। कुछ समय बाद रात को ही लेंटर भी पड़ गया।
नोटिस के बावजूद काम नहीं रोकने पर एक्ट के सेक्शन 27 के तहत पुलिस को काम रोकने के आदेश जारी किए जाते हैं। उसके बावजूद काम जारी रहने या पुलिस के स्तर से कार्रवाई नहीं होने पर सीलिंग की कार्रवाई की जाती है। जिन मामलों में ऐसी शिकायत मिली है, उनमें सीलिंग की कार्रवाई होगी।
- पीसी दुमका, सचिव, एमडीडीए