फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

...तो फर्जी से रीयल आईएएस बन जाती रूबी!

Sat, 11 Apr 2015 11:56 AM IST
राकेश शर्मा/अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
विज्ञापन
फर्जी आईएएस मामले की जांच कर रही एसआईटी हर नए खुलासे के बाद रूबी चौधरी के मकसद पर उलझ जा रही है। अकादमी में प्रवेश और राष्ट्रपति के साथ तस्वीर खिंचवाने के अलावा छह माह तक अकादमी में रहना यह साफ इशारा कर रहा है कि खेल बड़ा है।
विज्ञापन


जांच में यह भी पता चला है कि रूबी ने बतौर प्रशिक्षु आईएएस कपड़ा मंत्रालय से जुड़ा प्रोजेक्ट तैयार किया था। इसके लिए अकादमी की लाइब्रेरी से वह लगातार किताबें भी इश्यू कराती रहती थी।

ऐसे में माना जा रहा है कि अगर खेल बदस्तूर जारी रहता तो शायद किसी को भनक न लगती और केंद्रीय कार्मिक विभाग से प्रोजेक्ट को मंजूरी के साथ ही रूबी आईएएस भी बन जाती। लेकिन इस सबके बाद रूबी करने क्या वाली थी, यह किसी को मालूम नहीं हो सका है। रूबी ने भी अपने मकसद पर मुंह नहीं खोला है।
विज्ञापन

केंद्रीय मंत्री का नाम भी आया था सामने

बता दें कि रूबी चौधरी प्रकरण में पहले केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार का नाम भी उछल चुका है। सौरभ जैन और संतोष गंगवार दोनों बरेली के रहने वाले हैं। ऐसे में मामले में दोनों के तार जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है। रूबी भी यह कह चुकी है कि जैन से उसकी मुलाकात मंत्री के पीए के जरिये हुई थी।

लंबे समय से चल रही थी तैयारी
मुजफ्फरनगर के जिलाधिकारी की रिपोर्ट से साफ होता है कि रूबी ने अकादमी में प्रवेश का तानाबाना काफी पहले बुन लिया था। वर्ष 2013 में उसने खुद को आईएएस परीक्षा में चयनित घोषित किया।

स्थानीय मीडिया में यह जानकारी सार्वजनिक की थी। इसके बाद ग्रामीणों ने मदद कर उसे कार से मसूरी रवाना किया था। मसूरी आने के बाद उसने फर्जी आईकार्ड हासिल किया और खुद को प्रशिक्षु आईएएस के तौर पर प्रचारित किया।

रूबी की नहीं, मुलाकात करने वालों की एंट्री
छह माह तक एलबीएस अकादमी में रहने के दौरान रूबी चौधरी के अकादमी में आने-जाने का कोई रिकॉर्ड विजिटर्स रजिस्टर में नहीं है। हालांकि, उन लोगों का रिकार्ड जरूर है जो इस अवधि में रूबी से मिलने के लिए अकादमी आए। डीजीपी बीएस सिद्धू का कहना है कि रिकार्ड की जांच की जा रही है।
विज्ञापन

रूबी के पास था लाइब्रेरी का डिजिटल आईकार्ड

आईएएस अकादमी की 23 कि ताबे रूबी से बरामद हुई हैं। बताया जा रहा है कि अकादमी का लाइब्रेरी कार्ड कंप्यूटरीकृत है, जो सिर्फ प्रशिक्षु आईएएस को ही मिलता है। ऐसे में यह किताबें किस आधार पर जारी हुई यह सवाल उठने लगा है?

शुक्रवार को रूबी को लेकर एसआईटी लाइब्रेरी पहुंची, ताकि यह पता चल सके कि यह किताब किसके नाम पर इश्यू की गई है। पुलिस उप महानिरीक्षक संजय गुंज्याल की मानें तो अकादमी की लाइब्रेरी में इन किताबों का रिकॉर्ड नहीं मिला है। इससे मामला और गहरा गया है।

बोले डीजीपी
पूरे मामले में बड़ी साजिश की बू आ रही है। जांच में एक के बाद एक लगातार चौंकाने वाली जानकारी आ रही है। पहले तो फर्जी आईएएस बनकर अकादमी में रहना खेल नहीं, उस पर अकादमी में रहकर ही बड़ा प्रोजेक्ट बनाना संदेह पैदा करता है। जांच चल रही है। सब सच जल्द सामने आएगा।
-बीएस सिद्धू, डीजीपी
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें