चकराता वन प्रभाग की रिखनाड़ रेंज के सेरा-नाडा मोटर मार्ग के सुधार और अन्य निर्माण कार्यों में भारी अनियमितता प्रकाश में आने पर भी महकमे के आला अधिकारी अपने मातहतों पर जांच की आंच नहीं आने देना चाहते। शायद इसी कारण मामले के खुलासे के एक साल बाद भी जांच रिपोर्ट महज फाइलों में ही सिमट कर रह गई है।
18 लाख का था कामवर्ष 2009 से 2011 के बीच करीब 18 लाख की लागत से सेरा-नाडा मोटर मार्ग के करीब 14 किलोमीटर हिस्से पर सुधार कार्य कराया गया।
इसी के साथ वन रक्षक चौकी की मरम्मत, कक्ष संख्या-10 में सीसी रोड, सीमा पीलर और रेंज क्वाटर की छह लाख की लागत से मरम्मत कराई गई।हुआ खुलासाप्रधान पूरण सिंह राणा ने सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी मांगी तो मांगी विभाग की ओर से दी गई जानकारी में खुलासा हुआ कि निर्माण कार्यों में भारी धांधली हुई। मस्टरोल में फर्जी मजदूर दिखाए गए।
मंत्री ने दिए थे जांच के आदेशमार्ग पर कोई सुधार कार्य नहीं कराया गया। पिछले साल अगस्त में मामला प्रकाश में आने पर ग्राम्य विकास मंत्री प्रीतम सिंह ने जांच के आदेश प्रमुख वन संरक्षण को दिए थे।
जांच सौंप दीउन्होंने जांच मुख्य वन संरक्षक सतर्कता एवं विधि प्रकोष्ठ हल्द्वानी को सौंप दी, लेकिन एक साल बाद भी मामले में संलिप्त अधिकारियों और कर्मचारियों पर जांच की कोई आंच नहीं आई। प्रधान का आरोप है कि अधिकारी अपने मातहतों को बचाने के लिए जांच में देरी कर रहे हैं।
इनकी सुनिएमामले की नए सिरे से जांच के आदेश वन संरक्षक गढ़वाल को दिए गए हैं। जांच में दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों को बख्शा नहीं जाएगा।-डा.आरबीएस रावत प्रमुख वन संरक्षक उत्तराखंड