वहीं, आपातकालीन एंबुलेंस सेवा 108 के पूर्व कर्मचारियों के बीच पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने वहां मौजूद कई संगठनों को पुरानी बातें याद दिलाईं। उन्होंने कहा कि मैंने तो उपनल से लेकर अतिथि शिक्षकों तक सभी के लिए कुछ न कुछ किया था, लेकिन तुमने तो मुझे समझा ही नहीं। कहा था अब तो मोदी आएगा...अरे भाई आ गए मोदी क्या हुआ? आप सब अब सरकार के दरवाजे पर भटकने को मजबूर हो गए।
हरीश रावत धरनास्थल पर अपने चिर परिचित अंदाज में तंज कसते दिखे। उन्होंने कहा कि आप लोगों (उपनल, अतिथि, गैरसैंण आंदोलन आदि) को मैंने उस वक्त भी समझाया था। जिन मोदी की आप बात कर रहे हो वो बड़े डॉक्टर हैं। बड़े डॉक्टर के पास अगर फोड़े की समस्या लेकर जाओगे तो वह उसमें चिरा लगा देगा। इससे गैंगरीन होने का भी खतरा है।
अब लो हो गया गैंगरीन। हरीश रावत यहीं नही रुके। उन्होंने एक-एक कर सभी संगठनों को पुरानी बातें याद कराईं और अपने प्रयासों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि जब से नई सरकार आई है आपकी समस्या दूर करना तो दूर 20 आदमियों को भी नया रोजगार नहीं दे पाई है। हमने यह प्रदेश कंपनियों के लिए नहीं बनाया था अपने लिए हम सबके लिए बनाया था, लेकिन यह सरकार है कि हमें भूलकर एक कंपनी मात्र के लिए सोच रही है।
क्यों गैरसैंण वालों...अब मोदी लोक में बनेगी राजधानी
हरीश रावत ने गैरसैंण राजधानी निर्माण आंदोलनकारियों को कहा कि मैंने तो सचिवालय भी बनवा दिया था गैरसैंण में। अब बताओ वहां कुछ हुआ हो तो। उस समय तो आपको मैं धोखेबाज लगता था, लेकिन अब बताओ कितने बड़े कलाकार आ गए कि तुम्हारी तरफ देखा भी नहीं। अब तो राजधानी भी मोदी लोक में बनेगी क्यों भाईयों...।