एनएच74 घोटाले की एसआईटी जांच के लपेटे में लिए जाने से विचलित प्रदेश कांग्रेस अब पलटवार करने की तैयारी में है। इस मुद्दे पर सरकार को असहज करने के लिए पार्टी अब प्रदेश सरकार के एक कैबिनेट मंत्री पर निशाना साधेगी।
प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता मथुरा दत्त जोशी कहते हैं,'एसआईटी तत्कालीन राजस्व मंत्री से पूछताछ क्यों नहीं कर रही है।' बता दें कि पूर्व सरकार के समय जब एनएच -74 का भूमि अधिग्रहण हुआ तो उस समय में यशपाल आर्य राजस्व मंत्री थे। कांग्रेस छोड़कर भाजपा के टिकट से चुनाव जीते आर्य कैबिनेट मंत्री हैं। लेकिन अभी तक कांग्रेस उन पर सीधे-सीधे निशाना साधने से बच रही थी। लेकिन एसआईटी के कांग्रेस नेताओं के दरवाजे पर दस्तक देने के बाद अब कांग्रेस भी खुलकर सामने आ रही है। सियासी मंचों पर अपनी ढपली अपना राग अलाप रहे कांग्रेसी दिग्गजों के सुर अब एसआईटी जांच के मामले में एक जैसे हैं। पू्र्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने एसआईटी जांच को लेकर दो अहम मुद्दों को उठाया है। उनका कहना है कि एसआईटी जांच के दायरे से आर्बिटेशन को क्यों बाहर किया गया? इसे पार्टी के मुख्य प्रवक्ता ने ज्यादा स्पष्टता के साथा जाहिर किया है। उनका कहना है कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में राजस्व विभाग की अहम भूमिका है, लेकिन एसआईटी ने एक बार भी तत्कालीन राजस्व मंत्री से पूछताछ नहीं की। एनएचएआई के अफसरों को केंद्र सरकार दबाव में आकर एसआईटी की जांच के दायरे से बाहर कर दिया गया। यह बड़ा सवाल है कि एसआईटी को कांग्रेस के खाते में जमा हुए पांच करोड़ रुपये तो बड़े दिखाई दे रहे हैं, लेकिन 295 करोड़ किनकी जेब में चले गए, इसका सुराग वह पता नहीं लगाना चाहती। वह आरोप लगाते हैं कि एसआईटी पूरी तरह से केंद्र और प्रदेश सरकार के इशारे पर काम कर रही है। कांग्रेस नेताओं के बयानों से साफ जाहिर हो रहा है कि अब वे कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य के बहाने प्रदेश सरकार पर हमला बोलेंगे।