लोकसभा टिकट को लेकर राजधानी देहरादून में आयोजित कांग्रेस की पहली बैठक ही शॉर्टकट रही।
छोटे कार्यकर्ताओं का पैनल तक नहीं
यह सच है कि कांग्रेस में अंतिम फैसला आलाकमान का ही होता, लेकिन ब्लॉक, बूथ और जिलों में राजनीति चमकाने वाले छोटे कार्यकर्ताओं का पैनल देखा तक नहीं गया। जबकि आलाकमान की मंशा थी कि निचले स्तर से तीन-तीन सदस्यों के नाम मांगे जाएं।
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शायद इस प्रक्रिया से कुछ जमीनी नेताओं के नाम भी सामने आते, लेकिन लोकसभा सीटों पर फिलहाल जो भारी-भरकम नाम हैं उनके साथ छोटे नाम भी पैनल में बराबरी से खड़े होते दिखते।
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हरिद्वार से लोकसभा सांसद प्रदेश चुनाव समिति की बैठक में एक लाइन का प्रस्ताव लेकर आए थे। जिसे खारिज करने की हिम्मत वर्तमान राजनीतिक माहौल में शायद ही किसी की थी।
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प्रदेश की मंत्री इंदिरा ह्दयेश ने उसका अनुमोदन कर दिया और उम्मीदवारों के चयन का जिम्मा आलाकमान को सौंप दिया गया।
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बैठक में मौजद मुख्यमंत्री का कहना है कि हरीश रावत वरिष्ठ है उनके प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया गया। आलाकमान को अधिकृत करने का मॉडल उत्तराखंड का नहीं है। उत्तर प्रदेश से उपजे इस प्रदेश की राजनीति भी उसी आधार पर चलती है।
यशपाल आर्य भी उत्साहित नहीं
उत्तर प्रदेश ने ऐसा ही किया है। इस्तीफा सौंप चुके प्रदेश अध्यक्ष यशपाल आर्य इस मामले में अधिक उत्साहित भी नहीं हैं। उन्होंने जिलों से तीन-तीन नामों के पैनल तो मंगा लिए लेकिन यह भी जरूरी नहीं समझा कि बैठक में इस पर चर्चा हो।
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जबकि एक दिन पहले घोषणा की मंगलवार को बैठक के बाद ही पैनल भेज दिए जाएंगे। हां प्रदेश सह प्रभारी संजय कपूर जरूर कुछ चिंतित दिखे।
उन्होंने जिलों से मंगाए नामों को भेजने की बात कही है। अब देखना है कि इस पर अमल कितना होगा। बैठक में अनुशांगिक संगठनों के प्रतिनिधि भी थे लेकिन वह भी हां में हां मिलाते रहे।