बारह हजार करोड़ रुपये की चारधाम मार्ग योजना का शिलान्यास करने आ रहे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के देहरादून पहुंचने से पहले मुख्यमंत्री हरीश रावत ने करीब 5400 करोड़ रुपये की योजनाओं का शिलान्यास कर डाला।
सीबीआई के समन पर उन्हें सोमवार को दिल्ली जाना था। लेकिन दिल्ली जाने में असमर्थता जाहिर करते हुये मुख्यमंत्री दिन भर राज्य अतिथि गृह बीजापुर स्थित अस्थायी आवास में रहे। इस दौरान उन्होंने मुख्य सचिव समेत तमाम नौकरशाहों को बारी-बारी से बुलाया।
दिन भर मंत्रणा के बाद शाम को सीएम ने बीजापुर में पीएमजीएसवाई, लोनिवि व एमडीडीए की योजनाओं की करीब तीन दर्जन योजनाओं का शिलान्यास कर दिया। सीएम की इस कवायद को पीएम मोदी की मंगलवार को होने वाली रैली पर एडवांस पलटवार के तौर पर देखा जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दून जनसभा से पहले ही कांग्रेस और सरकार दोनों एक्शन में आ गए हैं। प्रदेश कांग्रेस की ओर से पार्टी के मुख्य प्रवक्ता मथुरादत्त जोशी ने मोर्चा संभाला। उन्होंने सवाल दागा कि पीएम को को ढाई साल बाद चुनाव के समय ही उत्तराखंड की याद क्यों आई? इससे पहले उन्होंने कभी राज्य की सुध क्यों नहीं ली? सियासी जानकारों की मानें तो संगठन और सरकार का ये ‘ओवर रिएक्शन’ इसलिए है क्योंकि मोदी जनसभा में कोई बड़ी घोषणा कर सकते हैं।
चारधाम मार्ग योजना के शिलान्यास के जरिये भी मोदी भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास करेंगे। वह भावी योजनाओं का एलान करके भाजपा को सत्ता में लाने का आह्वान करते दिखें तो हैरानी नहीं होगी। यही कांग्रेस की चिंता का बड़ा कारण है।
मोदी की रैली से ऐन पहले सीबीआई द्वारा समन किये जाने के बाद सबकी निगाहें हरीश रावत पर लगी थी। लेकिन वह सीबीआई के सामने पेश नहीं हुए।
चर्चा गर्म रही कि वह बीजापुर में भाजपा को सियासी फायदा लेने से रोकने का तोड़ तलाशते रहे। सचिवालय के अफसरों को बीजापुर आने का सिलसिला दिन भर चलता रहा। शाम को खुलासा हुआ कि मुख्यमंत्री बीजापुर में लोनिवि, पीएमजीएसवाई व एमडीडीए की 5400 करोड़ रुपये की योजनाओं का शिलान्यास करेंगे। सूत्रों की मानें तो सीएम मंगलवार को मोदी के चारधाम शिलान्यास कार्यक्रम में न सिर्फ शिरकत करेंगे बल्कि इस बहाने वह नोटबंदी से राज्य सरकार को हुए आर्थिक नुकसान, विभिन्न केंद्रीय योजनाओं की लंबित राशि व अन्य मसलों का एक मांग पत्र भी सौंप सकते हैं।