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रामपुर तिराहा गोलीकांड के सबूत किसने मिटाए, ये राजनाथ से पूछें मुख्यमंत्री: प्रीतम सिंह

Wed, 04 Oct 2017 01:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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रामपुर तिराह कांड की बरसी पर दिए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के बयान से कांग्रेस भड़क गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने मुख्यमंत्री के बयान को गैरजिम्मेदराना करार दिया।
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उन्होंने कहा कि कांग्रेस पर आरोप लगाने से पहले भाजपा को अपने गिरेबां में झांकना चाहिए। प्रीतम ने कहा कि प्रदेश में भाजपा की तीन बार सरकार रही। उसने आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों के लिए क्या किया, ये जगजाहिर है।

पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने भी मुख्यमंत्री के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया जाहिर की। उन्होंने कहा कि रामपुर तिराहा कांड के सबूत मिटाने का षड्यंत्र किसने किया, ये सवाल मुख्यमंत्री को केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह पूछना चाहिए, जिन्होंने तत्कालीन जिलाधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की अनुमति नहीं दी।
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दूरभाष पर अपनी प्रतिक्रिया में किशोर ने अफसोस जाहिर करते हुए कहा कि आज केंद्र में और दोनों राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं। जब 1984 के बोफोर्स मामले की दोबारा जांच खोली जा सकती है तो 1994 के रामपुर तिराहा कांड की भी भाजपा दोबारा जांच करा ले।

उन्होंने कहा कि जहां तक दोषियों को बचाने के लिए सबूत मिटाने का आरोप है तो मुख्यमंत्री को यह प्रश्न केंद्रीय गृहमंत्री से पूछना चाहिए। उन्होंने कहा कि रामपुर तिराहा कांड में हुए अमानवीय कृत्य एवं गोलीकांड की जवाबदेही सीधेतौर पर तत्कालीन जिलाधिकारी की बनती थी।

उनके खिलाफ कार्रवाई को लेकर पत्रावलियां भी चली। मगर तत्कालीन मुख्यमंत्री के पास जब पत्रावली पहुंची तो उन्होंने कार्रवाई करने के बजाय इसे लौटा दिया। राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप ने मुख्यमंत्री पर झूठ बोलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शहीद स्मारक बनाने, राज्य आंदोलनकारियों को पेंशन देने, उनके व आश्रितों को आरक्षण देने के लिए विधेयक लाने समेत कई कल्याणकारी निर्णय लिए।
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