कांग्रेस के सभी सीटों पर हारने से हरीश रावत सरकार को नंबर गेम के मामले में कुछ दिनों के लिए ही सही लेकिन राहत मिलने के आसार है। यह भी उन परिस्थितियों में जब कोई राजनीतिक उठापटक राज्य सरकार को बाधित करने लगे।
सांसद निर्वाचित हुए भाजपा के दो विधायकों निशंक व टम्टा की सीट कानून के तहत 30 मई को स्वत: ही रिक्त हो जाएगी। और, इसके छह महीने के भीतर दोनों पर उप-चुनाव कराना संवैधानिक बाध्यता होगी।
यह है सदस्यता खत्म होने का नियम
केंद्रीय समसामयिक सदस्यता प्रतिषेध अधिनियम 1950 में यह प्रोविजन है कि यदि कोई व्यक्ति संसद के लिए चुना जाता है, तो निर्वाचित होने की घोषणा के चौदह दिन बाद उसकी सदस्यता स्वत: ही समाप्त हो जाएगी।
चौदह दिन के ठीक बाद विधानसभा अध्यक्ष की तरफ से मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय को विस सीट रिक्त होने की सूचना देनी होगी।
इसके बाद स्पीकर की तरफ से सीईओ ऑफिस को दो सीटें रिक्त होने सूचना भेजी जाएगी। सीईओ ऑफिस सीट रिक्त होने की सूचना केंद्रीय निर्वाचन आयोग को भेजेगा।
कुछ ही समय बाद इन दोनों सीटों के रिक्त होने की अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। और, छह महीने की अवधि के भीतर दोनों सीटों पर उप-चुनाव कराना जरूरी हो जाएगा।
त्रिवेंद्र को मिल सकती है निशंक की सीट
भाजपा में डोईवाला और सोमेश्वर विधानसभा सीटों को लेकर हलचल शुरू हो गई है। आगामी तीस मई को दोनों सीटों के रिक्त हो जाने के बाद छह महीने के भीतर यहां उप-चुनाव कराए जाने हैं।
सूत्रों की माने तो डोईवाला से पार्टी के राष्ट्रीय सचिव व पूर्व कैबिनेट मंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को मैदान में उतारा जाएगा। त्रिवेंद्र इस सीट से दस साल तक विधायक रहे है, पिछले चुनाव में सीट बदलकर उन्होंने रायपुर से चुनाव लड़ा और 384 मतों से हार गए।
निशंक की बेटी भी हैं दावेदार
उधर, इस सीट से नए दावेदारों के रूप में सांसद निर्वाचित हुए रमेश पोखरियाल
निशंक की पुत्र अरुषि निशंक व पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष उषा भट्ट का
नाम भी चर्चा में है।
उधर, सोमेश्वर सीट पर भाजपा पूर्व जिला पंचायत
अध्यक्ष मोहन राम आर्य, 2002 में विस चुनाव लड़ चुके राजेश आर्य व रेखा
आर्य में से किसी को मैदान में उतारा जा सकता है।