आखिरकार केंद्रीय आलाकमान की फटकार के बाद उत्तराखंड की कांग्रेस सरकार और संगठन के रिश्तों में आई दरार को पाटने की कवायद तेज हो गई है। मुख्यमंत्री हरीश रावत हो या प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय दोनों खुले मंच से इस बात का एलान करने लगे हैं कि सरकार और संगठन के बीच किसी भी प्रकार के विवाद की स्थिति नहीं है।
पिछले दिनों राज्यसभा चुनाव के दौरान प्रत्याशी के चयन और सरकार के महत्वपूर्ण पदों पर संगठन पदाधिकारियों की उपेक्षा किए जाने से संगठन और सरकार के बीच रिश्ते तनावपूर्ण हो गए थे। संगठन पदाधिकारियों की बयानबाजी से सरकार की किरकिरी भी हो रही थी।
प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने देहरादून ही नहीं दिल्ली में जाकर इस बात को कह डाला था कि सरकार संगठन पदाधिकारियों की उपेक्षा कर रही है। प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय की अध्यक्षता में हुई जिलाध्यक्षों की बैठक में भी यह मुद्दा उठा।
जिलाध्यक्षों ने सरकार से जुड़े कई महत्वपूर्ण पदों को संगठन पदाधिकारी को सौंपने की मांग उठाते हुए यह मुद्दा उठा दिया था कि विधानसभा चुनाव के दौरान प्रत्याशियों के चयन में उनकी रायशुमारी की जाए।
सूत्रों की मानें तो मामला केंद्रीय आलाकमान तक भी पहुंचा। केंद्रीय आलाकमान ने सरकार और संगठन से जुड़े लोगों को नसीहत दी कि कुछ माह बाद राज्य में चुनाव होने है।
ऐसे में किसी भी प्रकार के विवाद की स्थिति न पैदा की जाए जिसका राजनीतिक खामियाजा भुगतना पड़े। आखिरकार केंद्रीय आलाकमान के हस्तक्षेप के बाद स्थिति में सुधार आया है। तभी तो प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय को कहना पड़ा कि सरकार के साथ किसी भी प्रकार के वैचारिक मतभेद नहीं है।
Published By : Nirmala Suyal