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चुनावी रण से गायब BJP और कांग्रेस के 'कैप्टन'

Wed, 26 Mar 2014 09:07 AM IST
अजित सिंह राठी/ अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड में दोनों राष्ट्रीय दल रामभरोसे चुनावी रण में कूदने जा रहे हैं।
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सांगठनिक तौर पर रणनीति तैयार कर नेताओं को एकजुटता के साथ चुनावी रण में उतारने की जिम्मेदारी प्रदेश प्रभारी की होती है। लेकिन दोनों दलों के प्रदेश प्रभारी व चुनाव प्रभारी गायब है। ये सब अपने चुनाव में व्यस्त है।

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ऐसे में दोनों ही दलों में सांगठनिक रूप से कसावट लाने वाले नेताओं का अभाव हो गया है। क्योंकि दोनों ही दलों में इतनी गुटबाजी है कि सभी को एकजुट करना प्रदेश अध्यक्ष के वश की बात नहीं है।
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प्रदेश चुनाव प्रभारी उमा भारती 'गायब'

भाजपा की बात करें तो प्रदेश प्रभारी राधा मोहन सिंह बिहार की पश्चिम चम्पारण से लोकसभा का चुनाव लड़ रहे है। जदयू से गठबंधन तोड़ने के बाद भाजपा पहली बार अकेले चुनाव मैदान में है। इसलिए ज्यादा मेहनत की जरूरत है।

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राधा मोहन सिंह लगातार तीन बार सांसद चुने जा चुके हैं। वह पिछले काफी दिनों से अपने चुनाव में व्यस्त है। पिछले दिनों कुछ समय के लिए देहरादून आए थे लेकिन अब अपना चुनाव निबटा कर ही आना होगा।

प्रदेश चुनाव प्रभारी उमा भारती भी चुनाव से पहले टिकट के लिए लड़ रही है। वह भोपाल से लड़ना चाहती है और पार्टी उन्हें झांसी से उतारना चाहती है।

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उमा भी इस कशमकश में उलझी है और अपने चुनाव प्रभार वाले प्रदेश से फिलहाल उनका वास्ता नहीं के बराबर है। उधर, प्रदेश कांग्रेस प्रभारी अंबिका सोनी भी अमृतसर से चुनाव लड़ रही है।
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कांग्रेस को भी अंबिका सोनी की जरूरत

फिलहाल प्रदेश कांग्रेस को अंबिका सोनी की जरूरत है लेकिन उनका चुनाव काफी टफ माना जा रहा है। इसलिए उनका ज्यादा समय पंजाब में ही बीतेगा।

उधर, सह प्रभारी संजय कपूर भी पीलीभीत से चुनाव मैदान में है। इसलिए केंद्रीय आलाकमान की तरफ से दोनों ही दल लावारिश हालात में है।

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दोनों ही दलों के जो मौजूदा अध्यक्ष हैं उनके खिलाफ पार्टी में ही कई गुट है तो समन्वय बैठाना ही मुश्किल है।

दरअसल, प्रदेश प्रभारी या चुनाव प्रभारी बनाने की पंरपरा इसीलिए शुरू की गई थी कि पार्टी के सभी गुट एक साथ काम करें। और, यहां चुनाव से पहले खैवनहार ही गायब है।
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