दो दिन में करीब बारह घंटे की मशक्कत के बाद भी उत्तराखंड के लिए कांग्रेस उम्मीदवारों पर स्क्रीनिंग कमेटी में आम सहमति नहीं बनी है। कहने को सभी वर्तमान विधायकों के टिकट पक्के हैं लेकिन सभी 26 के नाम पर स्क्रीनिंग कमेटी के सदस्य भी मौन हैं। यानि एक दो विधायकों के टिकट कट भी सकते हैं।
स्क्रीनिंग कमेटी में सहयोगी पीडीएफ विधायकों को लेकर भी कोई फैसला नहीं हो सका। लिहाजा पीडीएफ के विधायकों से कमेटी की अध्यक्ष शैलजा कुमारी अलग से बातचीत कर अंतिम फैसला लेंगी। पार्टी टुकड़ों में नाम घोषित न करके सभी उम्मीदवारों की घोषणा मकर संक्राति के बाद एक साथ करेगी।
पार्टी में सबसे बड़ी समस्या पीडीएफ विधायकों को लेकर है। हरीश चंद्र दुर्गापाल और हरिदास कांग्रेस के उम्मीदवार बनने को तैयार हैं। प्रीतम पंवार यूकेडी का झंडा नहीं छोड़ना चाहते हैं। मंत्री प्रसाद नैथानी और दिनेश धनै निर्दलीय मैदान में उतरना चाहते हैं लेकिन सभी चाहते हैं कि कांग्रेस उनके खिलाफ अपना उम्मीदवार न उतारे।
जल्द ही शैलजा से मिलेंगे पीडीएफ नेता
किशोर उपाध्याय
- फोटो : AmarUjala
वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सभी 70 सीटों पर अपने चुनाव निशान पर लड़ना चाहते हैं। इस पेंच को देखते शैलजा कुमारी ने इसका समाधान खुद निकालने का जिम्मा लिया है। जल्द ही पीडीएफ से जुड़े नेता उनसे मुलाकात करेंगे। सरकार के सहयोगी रहे सरवत करीम अंसारी फिर से बसपा के उम्मीदवार हैं लिहाजा उनके मुकाबले कैसा उम्मीदवार उतारा जाए, पार्टी इसे लेकर भी धर्म संकट में है। जबकि काजी निजामुद्दीन कांग्रेस के दावेदार हैं।
स्क्रीनिंग कमेटी के सामने सबसे बड़ी चुनौती उत्तराखंड के मैदानी जिले हैं हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जहां से सर्वाधिक दावेदार हैं। इतना ही नहीं पार्टी के कुछ बड़े नेताओं की भी नजर इन सीटों पर है। बैठक में इस बात पर भी चर्चा नहीं हुई कि मुख्यमंत्री हरीश रावत किस सीट से लड़ेंगे।
वहीं प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय को पार्टी मैदान में उतारेगी कि नहीं। स्क्रीनिंग कमेटी के सदस्यों के मुताबिक पार्टी क्षेत्रीय और जातीय संतुलन बनाने के लिए प्रदेश अध्यक्ष को भी मैदान में उतार सकती है। हालांकि इस पर कोई फैसला आलाकमान पर ही छोड़ा गया है।
बागी विधायकों के खिलाफ विशेष प्लान
किशोर उपाध्याय
- फोटो : file photo
पार्टी में एक वर्ग चाहता है कि कांग्रेस छोड़कर जाने वाले दस विधायकों के खिलाफ सभी बड़े नेताओं को उतारा जाए। मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष और रावत सरकार के मंत्री खुद इन सीटों पर मोर्चा संभाले। ऐसा करने से पार्टी उन नेताओं को टफ फाइट देगी और उनके मूल विधानसभा क्षेत्रों में उनकी ओर से कराए गए काम से पार्टी उम्मीदवार को जिताया जा सकेगा। हालांकि इस पर सहमति बनती नहीं दिख रही है।
पार्टी एक साथ घोषित करेगी उम्मीदवार: किशोर
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय का कहना है कि पार्टी अपने सभी 70 उम्मीदवारों की सूची एक साथ घोषित करेगी। पार्टी हर हाल में उन्हें चुनाव तैयारियों का एक महीना देगी। उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया चल रही है। टिकटों को लेकर संगठन और सरकार में कोई मतभेद नहीं है। हम दोनों ही चाहते हैं कि जिताऊ उम्मीदवार मैदान में उतरे।