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20 फीसदी वोटरों की चुप्पी से पसोपेश में सियासी दल 

Sun, 12 Feb 2017 11:22 AM IST
बिशन सिंह बोरा / अमर उजाला, देहरादून
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वोटिंग - फोटो : file photo
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विधान सभा चुनाव में प्रदेश के तीन लाख से अधिक कर्मचारी किसी भी दल का चुनावी समीकरण बनाने और बिगाड़ने की स्थिति में हैं, लेकिन मतदान की तिथि नजदीक आने के बावजूद कर्मचारियों ने अभी तक अपना नजरिया जाहिर नहीं किया है। जिससे राजनीतिक दल पसोपेश में हैं।
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आंदोलन से जन्में प्रदेश में सत्ता पर चाहे भाजपा काबिज रही या कांग्रेस, दोनों ही सरकारों में कर्मचारी अपने लंबित मुद्दों पर संघर्ष करते नजर आए। इनकी कई मांगों पर अमल हुआ तो कुछ आज भी अधूरी हैं। हालांकि सातवां वेतन लागू होने के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनो ही दल इन्हें अपने पक्ष में होना मान रहे हैं, लेकिन इनकी खामोशी ने दलों की परेशानी जरूर बढ़ा रखी है।

प्रदेश के सभी 70 विधान सभा क्षेत्रों में 74 लाख 95 हजार 672 मतदाताओं में से 20 फीसदी यानी 15 लाख मतदाता कर्मचारी और उनके परिजन हैं। जो देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर सहित विभिन्न जनपदों की विधान सभा क्षेत्रों में चुनावी परिणाम प्रभावित करने की स्थिति में हैं। राज्य आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाने वाले कर्मचारियों का कहना है कि हड़तालों के लिए कर्मचारी नहीं बल्कि सिस्टम जिम्मेदार है। आंदोलनों के कारणों की समीक्षा कर इसके प्रति जवाबदेही तय होनी चाहिए।
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प्रदेश में तीन लाख से अधिक कर्मचारी हैं, प्रति परिवार में पांच सदस्य भी शामिल किए जाएं तो इनकी संख्या 15 लाख से अधिक हो रही है, कर्मचारी चाहते हैं कि आंदोलनों के कारणों की समीक्षा कर जवाबदेही तय की जाए।
- रमेश चंद्र पांडे, उत्तराखंड कार्मिक एकता मंच

भाजपा रही हो या फिर कांग्रेस दोनों दलों ही सरकारों में कर्मचारियों की कई मांगे पूरी हुई तो कुछ आज भी अधूरी हैं, प्रदेश में जो भी सरकार बने कर्मचारियों के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।
- राजे सिंह नेगी, प्रदेश अध्यक्ष उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षक संघ

प्रदेश में कर्मचारियों के कुछ प्रमुख संगठन
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद, प्राथमिक शिक्षक संघ, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ, राजकीय कर्मचारी संघ, उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षक संघ, सचिवालय कर्मचारी संघ, इंटक, राजकीय प्रिंसिपल एसोसिएशन आदि।
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