उनकी जो जिम्मेदारी है, उन्हें वो जिम्मेदारी के साथ निभाएं। अधिक काम करने के लिए अधिकारी होते हैं। काम चोरी के लिए उन्हें अधिकारी नहीं बनाया गया है। इसलिए वह काम करें, कामचोरी करके बच नहीं सकते हैं। ऐसे अफसरों को जबरन सेवानिवृत्ति प्रदान की जाएगी।
मंत्री और विधायक भी उठा चुके हैं सवाल
मुख्यमंत्री से पहले कई मंत्री और विधायक अफसरों की मनमानी और काम नहीं करने का मामला उठाते रहे हैं। त्रिवेंद्र सरकार के वन मंत्री हरक सिंह रावत ने तो अपने विभागीय अफसरों के साथ मुख्यमंत्री कार्यालय के अफसरों पर भी सवाल खड़े कर दिए थे।
मुख्यमंत्री के सख्त लहजे से साफ हो रहा है कि इससे पहले अफसरशाही को लेकर सवाल उठाने वाले गलत नहीं थे। सीएम ने कहा कि सख्ती के बाद उत्तराखंड में अफसरों के अंदर कार्यशैली को लेकर जो सवाल उठ रहे हैं उस पर लगाम लगाई जा सकेगी।