‘साहब हमारी ग्राम पंचायत में अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियों की संख्या शून्य है, इसके बावजूद ग्राम पंचायत पष्टा को अनुसूचित जनजाति महिला के लिए आरक्षित कर दिया गया है। लगता है अधिकारियों ने जनसंख्या के आंकड़े नहीं देखे।’
पंचायतों में आरक्षण पर आपत्तियों की सुनवाई के दौरान एक जनप्रतिनिधि ने यह सवाल उठाया तो अफसरों को भी जवाब नहीं सूझा।
जिलाधिकारी ने सुनी आपत्तियां
विकास भवन में शुक्रवार को विकासनगर, चकराता और कालसी ब्लाकों की आपत्तियों पर सुनवाई हुई। जिलाधिकारी बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने आपत्तियां सुनी।
लगातार हैं कुछ सीटें सामान्य
विकासनगर की पपडियान क्षेत्र पंचायत के संदीप सिंह ने कहा कि पिछली बार भी सीट को सामान्य किया गया था, इस बार भी सामान्य है। जबकि एसटी जनसंख्या के अनुसार इसे आरक्षित किया जाना चाहिए। ढकरानी के कुछ लोगों ने सीट में 80 फीसदी ओबीसी आबादी बताते हुए सीट ओबीसी महिला करने की मांग की।
रुद्रपुर, जीवनगढ़, बाबूगढ़, चकराता के कोल्हा, मेरावना, बुराड़, विरनाडखत आदि क्षेत्रों के लोगों ने अपने क्षेत्रों के आरक्षण की स्थिति से अवगत कराया। सुनवाई के दौरान सीडीओ नीरज ज्योति खैरवाल, डीपीआरओ मोहम्मत मुस्तफा खान आदि मौजूद रहे।
यह गांव नहीं है, सर्वे चौक जाओ
पंचायत चुनाव की आपत्तियों पर सुनवाई के दौरान ही कुछ ग्रामीण आपस में उलझ गए। हंगामा होते देख जिलाधिकारी ने नाराजगी जताते हुए उन्हें झिड़कते हुए यह गांव नहीं है। आपस में बात करनी है या उलझना है तो बाहर सर्वे चौक जाओ।
जीओ लेकर पहुंचा ग्रामीण
कोल्हा क्षेत्र पंचायत क्षेत्र का एक ग्रामीण शासनादेश लेकर पहुंचा। कहा कि जीओ के मुताबिक जो सीट पहले महिला आरक्षित है, उसे फिर महिला आरक्षित नहीं किया जा सकता।
इस पर डीएम ने उसे पास बुलाकर जीओ पढ़ने के लिए कहा। जीओ की अगली लाइन में यथासंभव शब्द लिखा था, यानी स्थिति न बन पाने पर दोबारा महिला सीट हो सकती है। डीएम ने ग्रामीण को जीओ पूरा पढ़ने की सलाह दी।
कुछ सीटों पर हो सकता है बदलाव
तीन ब्लाकों की आपत्तियों पर हुई सुनवाई के बाद आरक्षण की स्थिति में कुछ बदलाव हो सकता है। संभावना है कि कुछ सीटों को अनुसूचित जनजाति से बदलकर अनुसूचित जाति या फिर सामान्य किया जा सकता है।