16 जून 2013 को आई आपदा की पीड़ित चुक्खूवाला निवासी बबीता को समझ में नहीं आ रहा वह क्या करें, और कहां जाएं? दरअसल आपदा में उनकी बस बह गई थी, जिसका अब तक अता-पता नहीं चला है। सरकार ने 50 हजार रुपये मुआवजे की घोषणा तो कर दी, लेकिन आज तक एक रुपये भी नहीं मिले।
आरटीए ने पांच साल पुराने मॉडल की गाड़ी उसी बस के परमिट पर लगाने की स्वीकृति दी, लेकिन परमिट की अंतिम तिथि से गणना के अनुसार। बबीता नई गाड़ी खरीदने में असमर्थ हैं। उन्होंने आपदा में बही गाड़ी के मॉडल से पांच साल पुरानी गाड़ी लगाने की मांग की थी, जिसे आरटीओ प्रशासन ने आरटीए की नीति का हवाला देते हुए मना कर दिया।
चुक्खूवाला में रहने वाले राकेश सोनकर की पत्नी बबीता देवी के नाम थाना कैंट परेड ग्राउंड से सुभाष रोड़ तक का सवारी गाड़ी का परमिट था, जो 14 सितंबर 2014 तक वैध था। परमिट पर वर्ष 2009 मॉडल की बस संख्या यूके 07 पीए 0466 संचालित हो रही थी। बस 16 जून को आई आपदा में बह गई। कमाई का जरिया खत्म हो जाने से परिवार आर्थिक तंगी से जूझने लगा।