न कोई कंपनी थी और न ही कारोबार फिर भी आठ महीनों तक लगातार सरकार के साथ ठगी करते रहे। संजय ठाकुर ने अपने साथियों के साथ मिलकर यह ठगी इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम की मदद से की। दरअसल, आरोपी संजय ठाकुर ने वास्तव में कोई कारोबार ही नहीं किया। उसने सिर्फ दूसरी फर्मों से बिल लिए और फिर उनके नाम पर बिल दर्शाए। इस तरह माल बेचने पर टैक्स देना दर्शाया और फिर इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी आईटीसी क्लेम के रूप में 24 करोड़ रुपये आठ महीने के भीतर सीजीएसटी से ले लिए। अब फिर से आईटीसी क्लेम किया तो मामला पकड़ में आ गया।
फर्म रजिस्ट्रेशन के लिए जमा किए बिजली के फर्जी बिल
आरोपियों ने फर्म रजिस्ट्रेशन के लिए कई तरह के फर्जी दस्तावेज लगाए थे। इसके लिए उन्होंने बिजली के फर्जी बिल भी बनवाए। इनकी जब विभाग ने तस्दीक की तो ये फर्जी पाए गए। अब पुलिस इन बिलों को बनाने वालों की भी जांच करेगी। साथ ही रजिस्ट्रेशन के वक्त भी सत्यापन किया जाता है। ऐसे में लग रहा है कि बिना सत्यापन के ही ये रजिस्ट्रेशन कर दिए गए।