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हिंदू-मुस्लिम एकता की इस अनोखी मिसाल को सलाम

Sun, 11 Jan 2015 04:38 PM IST
शादाब अली/ अमर उजाला, पिरान कलियर
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विश्व प्रसिद्ध पिरान कलियर में जियारत करने तो लाखों लोग आए। लेकिन उनमें कुछ ऐसे भी थे जो सेवादार बनकर आए और यहां सांप्रदायिक सौहार्द की भी मिसाल पेश कर गए। इन्होंने उर्स के दौरान जायरीनों की सेवा और उनकी मदद की।
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दरगाह परिसर से लेकर पूरे मेला क्षेत्र में साफ सफाई का विशेष अभियान चलाया। लंगर भी लगाया। शनिवार को इन जोशीले लोगों की टोली यहां से विदा हुई तो हर किसी की जुबान पर इनकी सेवा के जज्बों के किस्से थे।

हर साल साबिर पाक के उर्स में बटाला पंजाब से सेवा का जज्बा लेकर मिस्सी शाह के अनुयायियों का एक जत्था कलियर आता है। ये सभी हिंदू है लेकिन मजहब की दीवार से ऊपर उठकर सेवा और भाईचारा ही इनका धर्म है। इनका यह क्रम कोई एक-दो सालों से नहीं बल्कि पिछले तीस सालों से चल रहा है।
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ये लोग यहां 18 दिनों तक रहकर दरगाह परिसर सहित समूचे मेला क्षेत्र में झाडू लगाते हैं। नाले नालियां साफ करते हैं। यही नहीं जायरीनों के लिए लंगर भी लगाते हैं।
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धर्म और मजहब से ऊपर उठे लोग

हर साल की ही तरह इस बार भी इन लोगों ने परिसर में कई दरगाहों पर रंगरोगन कराया। इस जत्थे में शामिल महिलाएं, जवान, बुजुर्ग सभी जायरीनों की सेवा के लिए जुटे रहे।

उर्स में 18 दिनों तक सेवा में लगे रहे रवि बाबा, मासू, राजू, राजकुमार, रणधीर, राजेंद्र, हरेंद्र आदि का कहना है कि सेवा भाव ही सबसे बड़ा धर्म है। शनिवार को यह जत्था वापस पंजाब लौट गया। इनके लौटने पर यहां के बाशिंदे इनके जज्बे को दिल से सलाम करते दिखे। उर्स 23 दिसंबर से शुरू होकर 09 जनवरी तक चला।

मिस्सी शाह के अनुयायी वास्तव में धर्म और मजहब से ऊपर उठकर साबिर पाक की सेवा कर रहे हैं। जो इस बात का संदेश देता है कि हर इंसान को हर इंसान के मजहब को सम्मान देना चाहिए।
- नायाब सज्जादानशीं शाह मंजर एजाज साबरी

हर साल बटाला शहर से यहां पहुंचने वाले अनुयायी दिन रात उर्स में रहकर साफ सफाई करते हैं। जो अपने आप में मिसाल है।
- सूफी राशिद
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