शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत प्राइवेट स्कूलों में हुए दाखिलों की गड़बड़ियों पर उत्तराखंड शिक्षा महानिदेशक ने जांच बैठा दी है।
देहरादून सहित प्रदेश के सभी जिलों में आरटीई के दाखिलों की जांच के लिए 13 समितियों का गठन किया गया है। समितियां एक माह में शिक्षा महानिदेशक को रिपोर्ट देंगी। जांच में दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अमर उजाला ने तीन अगस्त से ‘गरीब बनकर छीना, गरीब बच्चों का अधिकार’ शीर्षक से राजधानी के निजी स्कूलों में आरटीई के तहत हुए दाखिलों की हकीकत बयां करने का सिलसिला शुरू किया था। अक्तूबर माह तक लगातार आरटीई में हुए फर्जीवाड़ों की पोल खोली गई। मामले को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा महानिदेशक डी सेंथिल पांडियन ने जांच बैठा दी है।
देहरादून में संयुक्त निदेशक माध्यमिक शिक्षा बीएस नेगी, एसएसए के डा. मुकुल कुमार सती और उप निदेशक आनंद भारद्वाज आरटीई की जांच करेंगे। हरिद्वार में अपर निदेशक महावीर सिंह बिष्ट, रमसा की शशिबाला चौधरी और एससीईआरटी के कुलदीप गैरोला आरटीई की जांच करेंगे।
नैनीताल में रमसा के एचपी विश्वकर्मा, उप निदेशक जेपी यादव और नरवीर सिंह बिष्ट जांच करेंगे। ऊधमसिंह नगर में एसएसए के केके गुप्ता, उप निदेशक गजेंद्र सिंह सोन और एमडीएम के संयुक्त निदेशक पीके बिष्ट जांच करेंगे।
पौड़ी में डायट प्राचार्य ललित मोहन चमोला, टिहरी में डायट प्राचार्य चेतन प्रसाद नौटियाल, रुद्रप्रयाग में प्राचार्य डायट सुधीर असवाल, अल्मोड़ा में प्राचार्य डायट डॉ. राजेंद्र सिंह, चमोली में प्राचार्य डायट कुंवर सिंह, चंपावत में प्राचार्य डायट कैलाश चंद्र शाक्य, पिथौरागढ़ में अपर निदेशक सीमैट एसबी जोशी, बागेश्वर में प्राचार्य डायट श्याम लाल आर्य और उत्तरकाशी में प्राचार्य डायट शिवप्रसाद सेमवाल को जांच सौंपी गई है।
शिक्षा महानिदेशक ने साफ किया है कि यह जांच समितियां इस साल हुए आरटीई के दाखिलों के तहत बच्चों की अर्हता की जांच करेगी। इसकी सूचना शासन को भी भेज दी गई है।