यह धूमकेतु साढ़े चार साल में सूर्य की परिक्रमा पूरी करता है। रात आठ बजे यूरेनस ग्रह व ओरायन नक्षत्र के बीच त्रिकोणीय स्थिति बनाते हुए रिट्नेन सप्तऋषि तारामंडल के पास नजर आएगा।
दूरबीन की मदद से इसे देखा जा सकेगा। इसके बाद वह सूर्य के पास पहुंचेगा। वह सूर्य की परिक्रमा पूरी कर आगे बढ़ जाएगा।
धूमकेतु के धरती के करीब पहुंचने से पहले उल्कावृष्टि 'जमीनीड् मेटियोर शॉवर' होगी। 14 दिसंबर की रात उल्कापात देखा जा सकेगा।
बता दें कि धूमकेतुओं को पुच्छल तारा भी कहते हैं और इनमें काफी बर्फ होती है। जब यह सूर्य के पास पहुंचते हैं तो रोशनी में लाखों किमी लंबी इनकी चमकदार पूंछ नजर आती है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि धूमकेतु सौरमंडल की उत्पत्ति में प्रकाश डालने में सहायक हो सकते हैं। जिस कारण वैज्ञानिक इनके अध्ययन में जुटे हुए हैं।