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सेना में रहकर कई कीर्तिमान स्थापित करने वाले कर्नल कोठियाल का सेवानिवृत्ति का आवेदन स्वीकार

Sat, 09 Jun 2018 09:29 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उत्तरकाशी
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colonel ajay kothiyal - फोटो : file photo
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भारतीय रक्षा मंत्रालय ने निम के निवर्तमान प्रधानाचार्य कर्नल अजय कोठियाल का समय पूर्व सेवानिवृत्ति का आवेदन स्वीकार कर लिया है। भारतीय सेना में 26 साल की सेवाओं के दौरान उन्होंने कई कीर्तिमान स्थापित किए। यही कारण रहा कि उन्हें कीर्ति चक्र, शौर्य चक्र, विशिष्ट सेवा मेडल जैसे प्रतिष्ठित अवार्ड से नवाजा गया। सेवानिवृत्ति के बाद कर्नल कोठियाल के राजनीति में सक्रिय होने के कयास लगाए जा रहे हैं। 

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वर्ष 1992 में गढ़वाल राइफल्स चौथी बटालियन में सेकेंड लेफ्टिनेंट के पद से भारतीय सेना में सेवा देने वाले कर्नल अजय कोठियाल की पहचान हमेशा एक साहसी, जुझारू, प्रेरक एवं मार्गदर्शक अधिकारी के तौर पर रही। कश्मीर में वर्ष 2001-03 के बीच ऑपरेशन पराक्रम, ऑपरेशन नशनूर एवं ऑपरेशन कोंगवतन में उन्होंने गोलियां लगने के बाद भी 26 आतंकियों को ढेर किया। इसके लिए उन्हें कीर्ति चक्र सम्मान से नवाजा गया। कर्नल कोठियाल का जज्बा और प्रेरक क्षमता ही है कि सेना युद्ध प्रशिक्षण केंद्र मऊ में एक स्क्वाड पोस्ट का नामकरण मेजर अजय कोठियाल के नाम पर किया गया है। 

वर्ष 1994 में सेना के हाई एल्टीट्यूट वारफेयर स्कूल से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उन्होंने सतोपंथ, माउंट माना, माउंट त्रिशूल, माउंट मनासलू के साथ ही एवरेस्ट पर दो बार सफल आरोहण किया। इसके लिए उन्हें शौर्य चक्र और मनासलू पर आरोहण के लिए विशिष्ट सेवा मेडल से नवाजा गया। साथ ही उन्होंने वर्ष 2005 में इंग्लैंड में 71 देशों के बीच हुई कैंब्रियन पैट्रोल में भारत का नेतृत्व करते हुए कांस्य पदक हासिल किया। 
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केदारनाथ पुनर्निर्माण में रही अहम भूमिका 
वर्ष 2013 में नेहरू पर्वतारोहण संस्थान उत्तरकाशी में बतौर प्रधानाचार्य तैनात हुए कर्नल अजय कोठियाल ने तब आपदा के दौरान खोज एवं बचाव कार्य में प्रतिभाग किया। जून 2013 में कोठियाल के नेतृत्व में निम की टीम ने केदारनाथ पुनर्निर्माण का जिम्मा उठाया और सफलतापूर्वक अंजाम दिया। इसी दौरान उन्होंने नंदादेवी राजजात को भी सफलता पूर्वक संपन्न कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 

इसलिए युवाओं के प्रेरणास्रोत हैं कर्नल कोठियाल 
निम में प्रधानाचार्य बनने के बाद कर्नल अजय कोठियाल ने पहाड़ के युवाओं को सेना में भर्ती के लिए प्रेरित एवं प्रशिक्षित करने का बीड़ा उठाया। बीते चार साल में निशुल्क प्रशिक्षण देकर वे अब तक दो हजार से अधिक युवाओं का सेना भर्ती में मार्गदर्शन कर चुके हैं। कोठियाल की प्रेरणा से गठित यूथ फांडेशन द्वारा सेना भर्ती पूर्व निशुल्क प्रशिक्षण कैंप चलाने के साथ ही दर्जनों असहाय बीमारों का निशुल्क उपचार भी कराया जा रहा है। 

भारतीय सेना ने मेरा समय पूर्व सेवानिवृत्ति का आवेदन स्वीकार कर लिया है। नई भूमिका अभी तय नहीं की है। पहले सेना में रहकर देश की सेवा की, अब युवाओं को सेना में भर्ती के लिए प्रेरित और प्रशिक्षित कर आगे बढ़ाने का इरादा है। यूथ फाउंडेशन के माध्यम से उत्तराखंड के युवाओं की ऊर्जा और क्षमताओं को राज्य एवं देश हित में इस्तेमाल करने का प्रयास किया जाएगा। 
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- कर्नल अजय कोठियाल, निवर्तमान प्रधानाचार्य निम उत्तरकाशी

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