उच्च शिक्षा अनुभाग की ओर से हाल में जारी किए गए शासनादेश से अशासकीय महाविद्यालयों के डिग्री शिक्षक नाराज हैं। शिक्षकों का कहना है कि शासन नियमों को दरकिनार कर अशासकीय महाविद्यालयों को अपने काबू में करना चाह रहा है। इस संबंध में गढ़वाल यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन(ग्रुटा) ने इस संबंध में डीएवी कालेज में एक बैठक आयोजित की।
यूजीसी के अनुसार छात्र-शिक्षक अनुपात लागू हो
बैठक में ग्रुटा में शिक्षकों ने कहा कि शासन द्वारा प्रबंध तंत्र से संचालित अशासकीय महाविद्यालयों के अधिकारों का अतिक्रमण किया जा रहा है जो कि संविधान के तहत अनुचित है। शासन ने यूजीसी के प्रावधानों से इतर प्रावधान मनमाने ढंग से लागू करने की अवैधानिक कोशिश की जा रही है।
शिक्षक संघ ने यह प्रस्ताव पारित किया कि शासन द्वारा छात्र संख्या के अनुरूप पठन-पाठन की व्यवस्था लागू की जाए, जिसके अंतर्गत यूजीसी के अनुसार छात्र-शिक्षक अनुपात का पालन सुनिश्चित हो।
इंफ्रास्ट्रक्चर लागू हो
शासन की आरे से संख्या में अनुपात में पर्याप्त शिक्षक भी नियुक्त किए जाएं। इसके साथ ही महाविद्यालयों में इंफ्रास्ट्रक्चर भी जरूरत के मुताबिक तैयार किया जाए। बैठक में फुक्टा अध्यक्ष डा. सुधीर गैरोला, महासचिव वीसी पांडे, ग्रूटा महामंत्री डा. डीके त्यागी, डा. वीपी जोशी, डा. अमिताभ, डा. आलोक श्रीवास्तव, डा. किरन सूद, डा. जीएस चौहान, डा. पुष्पा खंडूरी, डा. राकेश लाल शाह आदि मौजूद रहे।