देहरादून। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कोडिंग से मरीज और उसे होने वाले बीमारी का डाटा तैयार किया जाएगा। इसके लिए हर भर्ती मरीज की फाइल पर बीमारी का एक कोड डाला दर्ज होगा। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) के निर्देश पर अस्पताल प्रशासन ने इसकी कवायद शुरू कर दी है।
राजकीय दून मेडिकल अस्पताल में अब तक यह व्यवस्था नहीं थी। अब एमसीआई ने दून अस्पताल को भी कोडिंग व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं। इस पर दून अस्पताल प्रशासन ने सभी विभागाध्यक्षों को सर्कुलर जारी किया है। इसमें भर्ती मरीजों की फाइल में इंटरनेशल कोडिंग ऑफ डिजीज (आईसीडी) की प्रक्रिया अपनाने को कहा गया है। इसमें वैडेट टिकट (मरीज के भर्ती की फाइल) पर बीमारी का निश्चित कोड लिखना होगा। इसका डाटा तैयार कर एमसीआई को भी भेजा जाएगा।
क्या है कोडिंग का फायदा
दरअसल, राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न नए-पुराने रोगों की स्थिति जानने के लिए एमसीआई ने मरीजों के कोडिंग की व्यवस्था की है। इससे यह पता लगाने की कोशिश रहती है कि किस क्षेत्र, लिंग और आयु वर्ग में कौन से रोग बढ़ रहे हैं, उनके उपचार और रिकवरी की क्या स्थिति है। इसे फिर विभिन्न स्तर पर अलग-अलग लक्षणों आदि के आधार पर वर्गीकृत किया जाना है। ताकि इन रोगों पर शोध कर उनके उपचार और बचाव को लेकर नई खोज की जा सके।
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सभी विभागाध्यक्षों, सीनियर रेजीडेंट, जूनियर रेजिडेंट आदि को इस बारे में सकुर्लर जारी किया जा चुका है। सर्कुलर के साथ ही बीमारी के कोड भी संलग्न किए गए हैं। इससे जहां बीमारियों का डाटा तैयार हो सकेगा। वहीं एमसीआई की आपत्ति भी दूर की जा सकेगी।
-डॉ. केके टम्टा, चिकित्सा अधीक्षक दून अस्पताल