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देहरादून: शोभायात्रा दिन में नहीं रात में निकले तो, जाम से निपटने को आचार संहिता बनाने पर जोर

Sat, 14 Sep 2019 01:51 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

- प्रशासन जाम की समस्या से निपटने को कर रहा व्यवस्था को लागू करने पर विचार
- शहर में शोभायात्राओं के लिए आचार संहिता बनाने पर जोर 
- देश के कुछ शहरों में रात में निकाली जाती हैं धार्मिक शोभायात्राएं 
- जिला प्रशासन इन शहरों की व्यवस्था देखने को बनाएगा टीम 
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- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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मुमकिन है कि राजधानी में शोभायात्राओं का आयोजन अब दिन की बजाय रात में हो। शोभायात्रा के दौरान लगने वाले जाम को देखते हुए जिला प्रशासन गंभीरता से इस आइडिये पर काम कर रहा है। यह व्यवस्था देश के कुछ शहरों में पहले से लागू है और सफल भी रही है। जल्द ही इन शहरों के प्रशासन की योजनाओं को समझने के लिए एक टीम भेजी जाएगी। रोज रोज के जाम से बचने के लिए शोभायात्रा के लिए आचार संहिता तय करने की कवायद भी चल रही है। 

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शहर में हर साल लगभग 50 से 60 शोभायात्राएं निकाली जाती हैं। इनमें 25 से 30 बड़े आयोजन होते हैं, जिनमें वाहनों और झांकियों का बड़ा रेला होता है। शहर में यातायात की व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए पुलिस और प्रशासन समय समय पर नए प्रयोग करते हैं। कुछ समय के लिए व्यवस्था सुचारु हो जाती है तो एक छोटा सा आयोजन या रैली इस व्यवस्था को फिर बेपटरी कर देता है।

अपर जिलाधिकारी प्रशासन रामजीशरण शर्मा ने बताया कि इसके लिए एक निश्चित हल निकालने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे कम से कम धार्मिक शोभायात्राएं या इस तरह का कोई आयोजन यातायात में बाधक न बने। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश के इंदौर, ग्वालियर आदि शहरों में बड़ी शोभायात्राएं, जुलूस आदि की अनुमति सिर्फ रात के समय ही दी जाती है। ऐसे में वहां की व्यवस्थाओं को समझने के लिए एक दल भेजा जाएगा। देखा जाएगा कि यह व्यवस्था दून के लिए भी ठीक है या नहीं।
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धार्मिक संगठनों से हुई कई बार बात 
ऐसा नहीं है कि धार्मिक शोभायात्राओं के समय को लेकर पहले प्रयास नहीं हुए हैं। पहले भी पुलिस प्रशासन धार्मिक संगठनों से इस पर चर्चा कर चुका है। कुछ धार्मिक संगठन शोभयात्राएं, नगर कीर्तन आदि को सुबह (पांच बजे से पहले) निकालने पर सहमति जता चुके हैं। 

मानवाधिकार आयोग भी दे चुका है आदेश 
वर्ष 2017 में इस मामले में उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग भी मामले का संज्ञान ले चुका है। आयोग ने भी इन आयोजनों के समय में बदलाव लाने को कहा था, लेकिन सूत्रों के मुताबिक धार्मिक संगठनों के राजी न होने के कारण इन आदेशों का पालन भी नहीं किया जा सका था।

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