अपने लिए कुछ समय निकालने के लिए अब तीन चरण की जगह दो चरणों में पंचायत चुनाव होंगे। उत्तराखंड शासन के इस प्रस्ताव पर राज्य निर्वाचन आयोग ने भी सहमति जता दी है।
राज्य निर्वाचन आयुक्त सुवर्द्धन का कहना है कि आयोग की बाध्यता 29 मार्च से पहले चुनाव कराने की है। आयोग 26 मार्च को चुनाव परिणाम घोषित कर देगा। हालांकि अभी इस बात का जवाब नही है तीन दिन के अंदर-अंदर ग्राम सभाओं की पहली खुली बैठक कैसे हो पाएगी।
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सोमवार को मीडिया से मुखातिब निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि शासन ने पुनर्निर्माण के काम को देखते हुए आचार संहिता को कुछ समय ठहरकर लागू करने का आग्रह किया था। शासन की ओर से जिस कार्यक्रम को सहमति दी गई उस हिसाब से आचार संहिता दो मार्च से लागू होगी।
आयोग ने चुनाव का पूरा कार्यक्रम फाइनल कर शासन को जानकारी दे दी है। कार्यक्रम के मुताबिक चुनाव अब दो चरण में होंगे। नामांकन पत्र पांच मार्च से सात मार्च के बीच मिलेंगे। पहले चरण का मतदान 21 मार्च और दूसरेचरण का मतदान 24 मार्च को होगा। मतगणना 26 को होगी।
आयुक्त के मुताबिक आपदा से संबंधित सभी कामों को आचार संहिता के दायरे से बाहर रखा गया है। पंचायतों में बैठे प्रशासकों का कार्यकाल 29 मार्च को समाप्त हो रहा है। ऐसे में 29 मार्च से पहले चुनाव संपन्न कराना आयोग की बाध्यता है।
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पर इसमें भी एक पेच अभी फंसा हुआ है। 26 को मतगणना होगी। ऐसे में नवनिर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों के सामने 29 मार्च तक ग्राम सभाओं की पहली बैठक कराने का बोझ होगा। पंचायतों का गठन विधिवत इस पहली बैठक में पारित प्रस्ताव के आधार पर ही माना जाता है।
पहले पंचायतों के पास इस काम के लिए करीब एक सप्ताह का समय था। दूसरी ओर हाल ही में गठित नगर पंचायतों का पेच भी फं सा हुआ है। आयुक्त के मुताबिक इस मामले में शासन को स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है।
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.....सरकार की मंशा पर भी सवाल
पंचायतों के चुनाव बार-बार टलने से सरकार की मंशा पर भी सवाल उठ खड़े हो रहे हैं। डर पुनर्निर्माण का काम रुक जाने का है या फिर परीक्षा देने का। पुनर्निर्माण के काम नहीं रुकेंगे यह आयोग खुद भी स्पष्ट कर रहा है। पर मुसीबत पंचायतों में बेहतर प्रदर्शन न कर पाने पर लोक सभा चुनाव के प्रभावित होने का भी है।
लोकसभा के चुनाव की आचार संहिता भी 15 मार्च के आसपास लग सकती है। ऐसे में सरकार के लिए पंचायत और लोक सभा चुनाव एक साथ कराने की मजबूरी होगी। निर्वाचन आयुक्त का कहना है कि आयोग के पास पर्याप्त संसाधन हैं और चुनाव में कोई दिक्कत नहीं होगी।