मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कहा कि नेहरू वार्ड आजादी के परवानों का ‘मक्का’ है। पंडित नेहरू ने महात्मा गांधी के अहिंसा के संदेश को देश-विदेश में आगे बढ़ाया। आज भारत की ठोस विदेश नीति पंडित नेहरू की ही देन है।
नेहरू जयंती पर हेरिटेज सेंटर का लोकार्पण
मुख्यमंत्री ने बृहस्पतिवार को हरिद्वार रोड स्थित पुराने जेल परिसर में देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की जयंती पर हेरिटेज सेंटर का लोकार्पण किया।
नेहरू की प्रतिमा पर माल्यार्पण के बाद सीएम ने कहा कि धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बनाने में पंडित नेहरू का अहम योगदान है। उस दौर के नेताओं का कद बहुत बड़ा था। आज कई नेता महापुरुषों के नाम पर भी राजनीति करने में पीछे नहीं हटते। उन्होंने कहा कि हमें पंडित नेहरू के बताए रास्ते पर चलकर उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए।
संस्कृति विभाग कर रहा है सूची तैयार
हेरिटेज सेंटर से भावी पीढ़ी को पंडित नेहरू के आदर्शों से प्रेरणा मिलेगी। इस मौके पर पर्यटन मंत्री अमृता रावत ने कहा कि प्रदेश के अन्य ऐतिहासिक महत्व के केंद्रों को सुधारा जाएगा। इसके लिए संस्कृति विभाग से सूची तैयार कराई जा रही है।
मेयर विनोद चमोली ने उत्तराखंड आंदोलन के दौरान खुद भी नेहरू वार्ड में रहने की बात कही। मेयर ने सीएम से प्रदेश की ठोस हेरिटेज नीति बनाने, पोस्टमार्टम हाउस को आबादी से दूर शिफ्ट करने, हेरिटेज स्थलों के मेंटीनेंस के के लिए संसाधन बढ़ाने और पुस्तकालय खोलने की मांग की।
वार्ड सुधारने की मांग
अखिल भारतीय नेहरू ब्रिगेड के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष संतराम शर्मा ने अल्मोड़ा जिला जेल में भी नेहरू वार्ड की हालत सुधारने की मांग की।
इस मौके पर नेहरू ब्रिगेड की ओर से बच्चों को पुरस्कार भी बांटे गए। कार्यक्रम में विधायक राजकुमार, पूर्व कैबिनेट मंत्री हीरा सिंह बिष्ट, कांग्रेस नेता अशोक वर्मा, विजेंद्र प्रताप सिंह, कंवल सिंह, राकेश शर्मा, अनिल प्रजापति, गुरदीप सिंह नागपाल, पीसी वर्मा आदि मौजूद थे।
पाठ्यक्रम में शामिल होंगे डिस्कवरी के अंश
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंडित नेहरू की डिस्कवरी ऑफ इंडिया के सारांश को उत्तराखंड के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। इसके लिए सीएम ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश भी जारी किए हैं।
इसके अलावा उन्होंने हेरिटेज सेंटर में लाइब्रेरी खोलने की भी घोषणा की। इसमें पंडित नेहरू समेत विभिन्न महापुरुषों की जीवनी से संबंधित पुस्तकें उपलब्ध होंगी।
दून से था विशेष लगाव
नेहरू जी को दून से विशेष लगाव था। नेहरू ने कहा था कि जब मेरी मृत्यु हो तो मेरी राख को हिमालय की चोटियों पर डाल देना। पंडित नेहरू स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन के दौरान 1932, 1933, 1934 और 1941 में अलग-अलग चार बार दून जेल में बंद रहे। यहां पर पंडित नेहरू ने डिस्कवरी ऑफ इंडिया के कुछ अंश लिखे थे।