प्रदेश में डेंगू का प्रकोप अभी थमा नहीं रहा है। देहरादून, नैनीताल जनपद में डेंगू मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा है। हर रोज मरीजों का आंकड़ा बढ़ रहा है। बुधवार को भी देहरादून, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर जिले में 218 मरीजों को डेंगू की पुष्टि हुई है।
स्वास्थ्य महानिदेशक की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में डेंगू मरीजों की संख्या 4816 तक पहुंच गई है। इसमें देहरादून जिला में छह और नैनीताल में दो लोगों की मौत हुई है।
अब तक देहरादून में जनपद में 3037 मरीज, नैनीताल में 1355, हरिद्वार में 186, ऊधमसिंह नगर में 187, पौड़ी में 12, अल्मोड़ा में 9, बागेश्वर में तीन, चमोली में तीन, चंपावत में दो, रुद्रप्रयाग जनपद में डेंगू के छह मरीज हैं। जबकि उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ में डेंगू का एक भी मामला अभी तक सामने नहीं आया है।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने एच1 एन1 इंफ्लुएंजा के बारे में जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए है। उन्होंने कहा कि स्वाइन फ्लू का नाम देकर लोगों में दहशत का माहौल नहीं बनना चाहिए। यह एक सामान्य तरह का इंफ्लुएंजा है, जिसका इलाज संभव है। इसकी टेस्टिंग की सुविधा सरकारी अस्पतालों में मौजूद है। स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन को निर्देश दिए कि स्कूलों में जाकर बच्चों को जागरूक करें। सुबह स्कूलों की प्रार्थना सभा में इसकी जानकारी दी जाए।
मुख्यमंत्री ने बुधवार को एच1 एन 1 इंफ्लुएंजा से बचाव व उपचार की तैयारियां को लेकर अधिकारियों के साथ बैठक की। जिसमें वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलाधिकारी व मुख्य स्वास्थ्य अधिकारियों से अपडेट भी लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इंफ्लुएंजा को लेकर आम लोगों में भय न बने। इसके लिए बीमारी और इससे बचाव के उपायों की व्यापक प्रचार प्रसार किया जाए। उपचार के लिए आवश्यक दवाइयां भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहे। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में जिला अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति की भी जानकारी ली। उन्होंने ऐसे चिकित्सकों का विवरण उपलब्ध कराने का निर्देश दिया, जो लंबे समय से अनुपस्थित चल रहे हैं। बैठक में सचिव नितेश झा, प्रभारी सचिव डा. पंकज पांडेय सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।
इंफ्लुएंजा से डरने की नहीं जरूरत
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह एक सामान्य किस्म का इंफ्लुएंजा है। इससे घबराने जैसी कोई बात नहीं होती है। इसके मरीजों का बहुत कम प्रतिशत होता है, जिन्हें कि भर्ती कराए जाने की जरूरत पड़ती है। इसमें सामान्य सर्दी, जुकाम जैसे लक्षण ही होते हैं। घर पर ही इसका उपचार हो जाता है। बाजार में इसकी दवा पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है, लेकिन दवा केवल डाक्टर के परामर्श पर ही लें। केवल डायबिटीज व दमा आदि के रोगियों व उम्र दराज लोगों को सावधानी बरतनी होती है। अगर किसी बच्चे में इसके लक्षण दिखें तो स्कूल नहीं भेजा जाना चाहिए।