सरकार में नेतृत्व परिवर्तन की बयार ने अफसरों की नींद उड़ा दी है। जब से मुख्यमंत्री में बदलाव तय हुआ है, दफ्तरों का काम-काज ठप है।
अधिकतर अफसरों ने लंबित फाइलें निपटाने में ध्यान लगा दिया है। अफसरों के फोन नो-रिप्लाई जा रहे हैं। शुक्रवार पूरे दिन दफ्तरों का यही हाल रहा।
नहीं दिखे अधिकारी
जिलाधिकारी समेत अन्य विभागों के अगुवाओं ने ज्यादातर बैठकें कैंप कार्यालय में की। डीएम ऑफिस के समक्ष धरना-प्रदर्शन करने वालों के ज्ञापन एडीएम हरक सिंह रावत ने लिए। इसके बाद वे भी निकल गए।
अफसरों का कहना है कि सरकार के नए मुखिया के आने से न जाने ऊंट किस करवट बैठे। लोग मानसिक रूप से तैयार हैं।
कैंप कार्यालयों मे निपटाईं फाइलें
शुक्रवार को पूरे दिन विभिन्न विभागों के मुखिया अपने कैंप कार्यालयों में फाइलें निपटाते रहे। एक-दो बैठकें जो हुईं, उनका मुख्य मुद्दा लंबित काम रहे।
अफसरों का कहना है कि किसी वजह से बहुत सारे आदेशों पर दस्तखत नहीं हो पा रहे थे, उन्हें निपटा दिया गया।
मसूरी में गर्म रहा राजनीतिक पारा
सर्द मौसम में पर्यटन नगरी का सियासी पारा खासा गर्म रहा। चौक-चौराहाें, गली मोहल्लों में नए मुख्यमंत्री के नाम पर कयासबाजी होती रही।
हरीश रावत के साथ लंबे अर्से से जुड़े पूर्व विधायक जोत सिंह गुनसोला खेमा खुश नजर आया। विजय बहुगुणा के समर्थक माने जाने वाले पालिकाध्यक्ष मनमोहन सिंह मल्ल के खेमे में उदासी रही।
नए सीएम से उम्मीदें
उत्तरकाशी के जोशियाड़ा से नौकरी करने आए युवक संतोष नौटियाल का कहना है कि आपदा के बाद से सरकार के प्रयास नाकाफी रहे। नए सीएम से काफी उम्मीदें हैं।
जौनपुर प्रखंड के रचपाल रावत का कहना था कि प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन देर में किया गया। कांग्रेस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि बहुगुणा को मुख्यमंत्री बनाना ही आत्मघाती कदम था।