सियासी समर में दो सीटों से उतरे उत्तराखंड मुख्यमंत्री हरीश रावत को फंसाने के लिए भाजपा चक्रव्यूह तैयार करने में जुट गई है।
सीएम की घेराबंदी के लिए पार्टी ने किच्छा और हरिद्वार ग्रामीण क्षेत्र में उन नेताओं को साधने की रणनीति बनाई है, जिनका इन इलाकों में जनाधार और प्रभाव है। सीएम की दावेदारी के बाद पार्टी से किनारा करने वाले ऐसे नेताओं को लपकने के लिए पार्टी ने खास रणनीति तैयार की है। साथ-साथ पार्टी के दिग्गज नेताओं को दोनों सीटों पर अलग-अलग मोर्चे की कमान सौंपी है।
प्रत्याशियों के एलान के बाद अब चुनाव का गणित पूरी तरह से प्रचार अभियान, जोड़-तोड़, भितरघात जैसी सियासी चालों की कामयाबी पर निर्भर करेगा। भाजपा और कांग्रेस के बीच जंग मुद्दों के साथ चुनावी प्रबंधन की दिख रही है, जिसमें सीएम रावत फिलहाल अकेले पड़ते दिख रहे हैं। घेराबंदी के लिहाज से भाजपा का कुनबा कहीं बड़ा दिख रहा।
भाजपा के प्रचार अभियान में उनका टारगेट रावत हैं, जिनके दो सीटों से उतरने की रणनीति को अब उन्हीं के खिलाफ इस्तेमाल करने का दांव चलने की तैयारी है। हरिद्वार ग्रामीण सीट पर कई समीकरण हैं, जो दोनों दलों के लिए चुनौती है। सूत्रों के मुताबिक भाजपा ने इस सीट पर रावत को सीमित रखने के लिए सांसद रमेश पोखरियाल निशंक की जिम्मेदारी दी है। पार्टी में निशंक की यह अग्निपरीक्षा भी मानी जा रही है।
भाजपा यहां अकेले निशंक के भरोसे ही नहीं रहेगी। तोड़फोड़ की राजनीति को अपना, क्षेत्र के चार कद्दावरों पूर्व राज्य मंत्री संतोष कश्यप, पूर्व प्रदेश महासचिव भगत दास सहित दो अन्य को पूर्व सीएम विजय बहुगुणा अपने पाले में ला चुके हैं। भाजपा प्रत्याशी यतीश्वरानंद 2014 के लोकसभा चुनाव में 3200 वोट की बढ़त दिलाने में कामयाब रहे थे।
मुस्लिम समीकरणों को साधने के लिए पार्टी ने यहां अपने विश्वस्त नेताओं को उतार दिया है। बसपा प्रत्याशी मुकर्रम का गणित इस सीट पर काफी कुछ तय करेगा, जिसके लिए कांग्रेस और भाजपा अपनी रणनीति बना रही हैं। भाजपा की इस सीट पर बड़ा दांव पीएम नरेंद्र मोदी की जनसभा भी हो सकती है, जिसका प्रस्ताव पार्टी की ओर से गया है।
उधर, किच्छा सीट पर समीकरण हरिद्वार सीट से बिल्कुल अलग हैं। रावत के खिलाफ भाजपा का पहला दांव उन्हें बाहरी साबित कर देने का है। कांग्रेस ने यह दांव वर्ष 2012 में कोटद्वार में भाजपा नेता बीसी खंडूड़ी के खिलाफ चला था जिसे भाजपा ने कारगर होते देखा था। भाजपा ने इस सीट पर अपने प्रत्याशी और विधायक राजेश शुक्ला को जिताने के लिए रणनीतिक घेराबंदी की है। सांसद भगत सिंह कोश्यारी का सीट पर प्रभाव है।
लोकसभा चुनाव में कोश्यारी ने इस विधानसभा से 14 हजार वोट से अधिक की लीड ली थी। अब सीएम रावत के आने से इस लीड को बरकरार रखने की चुनौत कोश्यारी के सामने है। कोश्यारी के साथ यहां पूर्व सीएम विजय बहुगुणा और यशपाल आर्य भी रहेंगे। बहुगुणा और आर्य की मौजूदगी में किच्छा कांग्रेस में असंतोष को भी पार्टी हवा दे सकती है। कांग्रेस नेत्री शिल्पी अरोड़ा के सीएम के खिलाफ उतरना उनके लिए भाजपा से इतर चुनौती रहने वाली है। भाजपा दोनों सीटों पर मुकाबले को इतना कठिन बना देना चाहती है ताकि सीएम यहां घिर कर रह जाएं।