मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनीतिक दलों के बीच मतभेद लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा हैं, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विषयों पर चर्चा तथ्यात्मक और जिम्मेदारीपूर्ण होनी चाहिए। उत्तराखंड ने देश को अनेक ऐसे सपूत दिए हैं, जिन्होंने राष्ट्रसेवा, सैन्य पराक्रम और राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
प्रदेश को उनकी उपलब्धियों पर गर्व है। उन्होंने कहा, देवभूमि उत्तराखंड अपने सपूतों के सम्मान से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं करेगी। राष्ट्रीय सुरक्षा के विषयों पर राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन सार्वजनिक संवाद में मर्यादा और जिम्मेदारी बनाए रखना सभी का दायित्व है।
राहुल गांधी की टिप्पणी से भड़की भाजपा, कैबिनेट मंत्री और विधायक ने कांग्रेस को घेरा
रष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल पर राहुल गांधी की टिप्पणी को भाजपा ने अमर्यादित बताया है। जिले में भाजपा पदाधिकारियों, विधायकों और कैबिनेट मंत्री समेत अन्य जनप्रतिनिधियों ने कांग्रेस पर जमकर हमला बोला। उन्होंने उत्तराखंड कांग्रेस कमेटी से इस बयान पर स्पष्ट जवाब मांगा है।
भाजपा नेताओं ने कहा कि कांग्रेस को अपने नेता के बयान के समर्थन या विरोध में राज्य की जनता को प्रेस के सामने आकर बताना होगा। भाजपा ने पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस विपिन रावत पर की गई टिप्पणी को भी मुद्दा बनाया। भाजपाइयों ने मंगलवार को इस मुद्दे पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि सेना का मनोबल घटाने और सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल उठाने वाली कांग्रेस पाकिस्तान की भाषा बोल रही है। भाजपा ने इस पूरे प्रकरण को देशद्रोह की श्रेणी में रखते हुए जांच कराने पर जोर दिया।
कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि कांग्रेस राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने पहले भी सेना का मनोबल गिराने के कृत्य किए हैं। उन्होंने उत्तराखंड कांग्रेस से राज्य के सपूतों के साथ खड़े होने या पार्टी के नेता के साथ होने पर जवाब मांगा।
विधायक आदेश चौहान ने कहा कि कांग्रेस अपने स्थापना काल से ही पाकिस्तान की भाषा बोल रही है। उन्होंने कहा कि देश की जनता ने इसे समझ लिया है और कांग्रेस को दरकिनार किया है। आदेश चौहान ने कांग्रेस नेताओं से सार्वजनिक तौर पर माफी मांगने की मांग की। मेयर किरण जैसल ने कहा कि कांग्रेस देश को कई बार आघात पहुंचा चुकी है और अब अपनी सीमाएं लांघ रही है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की माताएं अपने सपूतों को देश की सुरक्षा के लिए भेजती हैं।