प्रश्न: आपने नए जिले जल्द बनाने के लिए संकेत दिए हैं। इस मामले में बात कहां तक पहुंची है?
-हम इस संबंध में जनप्रतिनिधियों से जल्द वार्ता शुरू करने जा रहे हैं। इसके बाद ही इस पर विचार करेंगे।
प्रश्न: पलायन उत्तराखंड की एक बड़ी समस्या है। इस पर काम की रफ्तार बहुत धीमी दिख रही है?
नहीं इस पर भी पूरी गंभीरता से काम चल रहा है। पलायन आयोग का नाम बदलकर हमने पलायन रोकथाम आयोग कर दिया है। आयोग जल्द ही अपनी रिपोर्ट देगा।
प्रश्न: जैसा कि आप जानते हैं सरकार में रोजगार के अवसर सीमित हैं। युवाओं को प्राइवेट सेक्टर में रोजगार देने के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं?
दरअसल हमारा फोकस स्वरोजगार पर है। इस बारे में हमने बैंकों से बात की है कि वे भी सरलीकरण समाधान प्रक्रिया को अपनाएं ताकि छोटे कर्ज के लिए लोगों को दौड़ भाग न करनी पड़े। किसानों को फार्म मशीनरी बैंक के जरिए कृषि उपकरणों पर 70 से 80 फीसदी तक सब्सीडी दी जा रही है।
प्रश्न: उत्तराखंड सरकार समान नागरिक संहिता लाने जा रही है। इसे लेकर खासतौर से मुस्लिम समुदाय आशंकित है?
यह मुद्दा तो हमने चुनाव से पहले ही तय कर दिया था। इस मुद्दे पर हमें जनादेश मिला। इसमें हम सभी हितधारकों से बात कर रहे हैं। उनसे सुझाव ले रहे हैं। इसलिए किसी समुदाय वर्ग को आशंकित होने की जरूरत नहीं है।
प्रश्न: देहरादून समेत कई जिले कचरे की समस्या से जूझ रहे हैं। इसका समाधान कब होगा?
हां ये समस्या गंभीर है। इसके लिए हम नए ट्रंचिंग ग्राउंड की तलाश कर रहे हैं।
ये भी पढ़ें...Uttarakhand @2025: मंत्री और अफसर करेंगे सशक्त उत्तराखंड पर मंथन, 29 सितंबर से तीन दिन तक चलेगा चिंतन शिविर
प्रश्न: महिलाओं और राज्य आंदोलनकारियों के क्षैतिज आरक्षण को बचाने के लिए सरकार क्या कदम उठाने जा रही है?
हम महिलाओं के आरक्षण के लिए लड़ेंगे। चाहे हमें अध्यादेश लाना पड़े या सुप्रीम कोर्ट जाना पड़े हम दोनों विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। मैंने राज्यपाल से राज्य आंदोलनकारियों का बिल लौटाने का अनुरोध किया था। अब हम इसका परीक्षण कर रहे हैं।