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सीएम की चाची ने दी आत्मदाह की 'धमकी'

Fri, 08 Nov 2013 03:38 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
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उस राज्य का हाल कैसा होगा, जहां खुद मुख्यमंत्री अपने रिश्तेदारों तक को नहीं पहचानते। हाल यह है कि उत्तराखंड राज्य आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाली मुख्यमंत्री की चाची अंशी बहुगुणा को अपनी पहचान, सम्मान और पेंशन के लिए एक बार फिर धरने और प्रदर्शन का सहारा लेना पड़ रहा है।
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इसके लिए आत्मदाह करने भी वे तैयार हैं, ताकि शायद इसके बाद मुख्यमंत्री की आंखें खुलें। शुक्रवार को जब अमर उजाला ने उनसे बात की तो उनका दिल का दर्द जुबां पर आ गया।

आंदोलनकारियों की लड़ाई
कचहरी स्थित शहीद स्मारक में उत्तराखंड राज्य निर्माण चिह्नित आंदोलनकारी मंच के बैनर तले धरने पर बैठी 80 साल की अंशी बहुगुणा आज आंदोलनकारियों की लड़ाई लड़ रही हैं। मुख्यमंत्री की चाची होने के बावजूद उनके चेहरे पर तनिक भी अहम नहीं दिखा।
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अमर उजाला से बातचीत के दौरान बुघाड़ी निवासी अंशी बहुगुणा ने बताया कि वे वर्तमान में ब्राह्मण मोहल्ला, श्रीनगर में रहती हैं। उनके पति रेवती बल्लभ बहुगुणा की पूर्व में ही मृत्यु हो चुकी है। उत्तराखंड राज्य आंदोलन के बारे में उनका कहना है कि हमने सोचा था कि अपना छोटा सा राज्य होगा।

हालत पहले से अधिक बेकार
हमारे बच्चों को नौकरी मिलेगी, विकास होगा और सबकुछ मिलेगा। मगर हुआ उल्टा। राज्य बनने के बाद यहां ही हालत पहले से अधिक बेकार हो गई है। मुख्यमंत्री से इस बारे में बात करने के विषय में पूछा तो उन्होंने कहा कि एक बार भतीजा आया था, लेकिन वो तो पहचानता भी नहीं।

न तो आज तक कोई पेंशन मिली और न आश्रित को नौकरी। मिला है तो बस एक कार्ड, उसको भी कोई पूछता नहीं। 1994 में श्रीनगर आंदोलन से सक्रिय हुई अंशी बहुगुणा ने गैरसैंण, रामनरग, पिथौरागढ़, टिहरी, चमोली, उत्तरकाशी, रामपुर आदि जगह भी गई।
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