उत्तराखंड में बारिश का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। राज्य के पहाड़ी इलाकों में हो रही मूसलाधार बारिश लगातार 'कोहराम' मचा रही है।
पौड़ी में पाबौ ब्लॉक के छानी गांव में बादल फटने से बहुत नुकसान हुआ। बारिश की चपेट में आने से गांव की सड़क पर खड़ा ट्रक, एक कार और तीन बाइक बहकर क्षतिग्रस्त हो गए जबकि पानी का रैला ग्रामीणों के दर्जनों खेतों को तबाह कर गया। दूसरी ओर देवप्रयाग के सिरसेट और सुन्नी गांव में भी बादल फटने से कृषि भूमि और पेयजल लाइन को क्षति पहुंची है।
पाबौ ब्लॉक के छानी गांव में गुरुवार की सुबह चार बजे गांव के ऊपर गुसगढ़ जंगल में तेज गड़गड़ाहट की आवाज के साथ बादल फट गया। इस दौरान भारी मात्रा में पानी और मलबे का रैला गांव के किनारे से निकल गया।
बादल फटने की आवाज आते ही सभी ग्रामीण घरों से बाहर सुरक्षित स्थानों की ओर भागे। बाद में मलबा और पानी गांव में आ गया जिससे गांव की सड़क पर खड़ा ट्रक, एक मारुति कार और दो बाइक बह गईं। इसके अलावा ग्रामीणों के खेत, पेयजल योजना, बिजली के पोल, संपर्क मार्ग का पुल बह गया।
लोगों के खेतों और सड़क पर बड़े-बडे बोल्डर पड़े हुए हैं। घटना की सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचे राजस्व उप निरीक्षक सूर्य प्रकाश भट्ट ने बताया कि क्षति की रिपोर्ट शासन को भेजी जा रही है। ग्रामीण बचन सिंह, वीरेंद्र सिंह, दिलवर सिंह और यशपाल ने बताया कि इस घटना से पूरा गांव सहमा हुआ है। घटना से गांव की पेयजल लाइनें क्षतिग्रस्त होने से गांव के लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हैं।
बादलों ने मचाई तबाही
दूसरी ओर देवप्रयाग तहसील के कड़ाकोट पट्टी के सिरसेट और सुन्नी गांव में बादल फटने से कृषि भूमि और पेयजल लाइन को क्षति पहुंची है। दोनों गांवों में करीब चार हेक्टेयर कृषि भूमि पर उगी फसल तबाह हो गई, जबकि कई गांवों की पेयजल आपूर्ति ठप हो गई।
बुधवार रात सिरसेट से करीब एक किलोमीटर ऊपर तोल तोक में बादल फटने से बरसाती गदेरा उफान पर आ गया और तीन हेक्टेयर कृषि भूमि बहा ले गया। सिरसेट गांव से पांच किलोमीटर दूर सुन्नी गांव में भी बादल फटने से एक हेक्टेयर कृषि भूमि बर्बाद हो गई।
सिरसेट गांव में बादल फटने से खर्क में भूस्खलन सक्रिय हो गया है। वहीं गदेरों में मलबा आने से डांग, सरक्याणा, बगर और रणकंडियाल गांवों की पेयजल योजना क्षतिग्रस्त हो गई। तहसीलदार बीएस मंडागी ने बताया कि राजस्व उप निरीक्षक को निर्देशित किया गया है कि प्रभावित क्षेत्र की पत्रावलियां तत्काल बनाए।
भूस्खलन के लिए संवेदनशील 354 गांव
उत्तराखंड में भूस्खलन के लिए संवेदनशील घोषित 354 गांवों में हजारों परिवार खतरे में जी रहे हैं। बरसात में इन गांवों में हमेशा खतरा मंडराया रहता है। इनमें से 129 गांवों का अब तक भूगर्भीय सर्वे तक नहीं हो पाया है।
प्रदेश में वर्ष 2010 से पहले संवेदनशील गांवों की संख्या 233 थी। अब यह संख्या 356 हो गई है। विस्थापन नीति तैयार होने के छह वर्षों में मात्र दो गांवों को ही विस्थापन हो पाया है। इनमें रुद्रप्रयाग जिले का छातीखाल और चमोली जिले का फाकड़े गांव शामिल है। भूस्खलन से संवेदनशील 129 गांव ऐसे हैं जिनका अब तक भूगर्भीय सर्वेक्षण तक नहीं हो पाया है।
पिथौरागढ़ सर्वाधिक संवेदनशील गांव
आपदा न्यूनीकरण केंद्र के अनुसार भूस्खलन की दृष्टि से सर्वाधिक संवेदशनील 129 गांव पिथौरागढ़ जिले में हैं। चमोली जिले में 61, बागेश्वर में 42, अल्मोड़ा में नौ, नैनीताल में छह, टिहरी में 36, उत्तरकाशी में आठ, रुद्रप्रयाग में 14, चंपावत में 10, देहरादून में दो और ऊधम सिंह नगर में एक है। पौड़ी जिले में 26 गांव भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील है। जबकि पौड़ी जिला प्रशासन के रिकार्ड में इनकी संख्या 38 हैं।
भूस्खलन से संवेदनशील गांवों का भूसर्वेक्षण कराया जा रहा है। 225 गांवों का भूसर्वेक्षण किया जा चुका है।
- संतोष बड़ोनी उप सचिव आपदा प्रबंधन उत्तराखंड