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उत्तराखंड: बारिश से उफान पर रामगंगा, चमोली-अल्मोड़ा में बादल फटने से भारी नुकसान, एक की मौत

Mon, 03 Jun 2019 08:27 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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उफान पर आई रामगंगा - फोटो : अमर उजाला
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भीषण गर्मी के बीच रविवार शाम को उत्तराखंड में मौसम ने करवट बदली। पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश से मौसम जहां सुहावना हो गया है, वहीं कुमाऊं में रामगंगा उफान पर आ गई। उत्तराखंड के चमोली जिले में बादल फटने से लामबगड़(गैरसैंण) में भारी नुकसान हुआ है। वहीं एक एक व्यक्ति की मौत हो गई। 

 

अल्मोड़ा जिले में चौखुटिया से सात किमी दूर खीड़ा इलाके में रविवार शाम बादल फटने से एक व्यक्ति राम सिंह लापता हो गया, जबकि तीन गोशालाएं बह गईं। बादल फटते वक्त वह बैलों को बांधने गौशाला गया हुआ था। गांव के एक व्यक्ति की 15 बकरियां, जबकि अन्य के नौ खच्चरों के लापता होने की भी सूचना है। जुकाणी में दो छोटी गाड़ियां (रोनाल्ड क्वीड तथा वैगनआर) मलबे में दबी हैं। खजुराणी में सड़क टूटने की सूचना है। पीएमजीएसवाई की जेसीबी मलबे में दबी है। वहीं, पुण्याबगड़ पंचायत घर के पास एक बस फं सी हुई है। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में बादल फटा है, जबकि जिला प्रशासन बादल फटने की बात से इनकार कर रहा है। 

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इसके अलावा, पहाड़ पर कई इलाकों में मूसलाधार बारिश हुई। इससे चौखुटिया में रामगंगा और गरुड़ तहसील क्षेत्र में गरुड़ गंगा उफान पर आ गई।  गरुड़ (बागेश्वर) तहसील क्षेत्र में रविवार को तीन घंटे तक झमाझम बारिश हुई। तेज बारिश के चलते कौसानी-बैजनाथ मोटर मार्ग पर कई जगहों पर मलबा आ गया है। गरुड़, बैजनाथ, गागरीगोल मोटर मार्ग पर तीन घंटे यातायात ठप रहा। गरुड़-फल्याटी, गागरीगोल-चनोली-नरग्वाड़ी सड़क भी मलबे से पट गई। कपकोट (बागेश्वर) के लौधूरा में बिजली गिरने से 88 बकरियां मर गईं। घटना शनिवार को उस वक्त हुई गांव के आठ पशुपालक अपनी 500 बकरियों को चराने के लिए बुग्यालों की ओर ले जा रहे थे। 

 

वहीं रामगंगा के उफान पर होने से पुलिस प्रशासन ने लोगों को गंगा किनारे न जाने का अलर्ट भी जारी किया है। गढ़वाल क्षेत्र में कई जगह ओलावृष्टि भी हुई। उधर, मैदानी इलाकों में धूल भरी आंधी और तेज हवाओं ने लोगों के लिए परेशानी खड़ी कर दी। पहाड़ में बारिश से मैदानी क्षेत्रों में भी थोड़ी ठंडक महसूस हुई है।

कर्णप्रयाग, गैरसैण, आदिबदरी में बारिश से मिली राहत 

रविवार शाम को कर्णप्रयाग, गैरसैण, आदिबदरी सहित आसपास के क्षेत्रों में बारिश आने से मौसम सुहावना हो गया है। बारिश से जंगलों की आग बुझ गई और लोगों को धुआं छंटने से काफी राहत मिली। गांवों में बारिश के लिए इंद्रदेव को मनाने में जुटे किसानों ने भी खुशी जताई है। 

पिछले एक सप्ताह से कर्णप्रयाग में जंगलों की आग से फैले धुएं और गर्मी से लोग बेहाल थे। रविवार शाम को करीब चार बजे तेज बारिश आने के बाद धुंध पूरी तरह से छंट गई। बारिश से नगर में नालियां बंद होने से पूरा पानी सड़क पर फैल गया, इससे सड़क और पैदल रास्तों में आवाजाही करने वालों को दिक्कतें हुईं। नालियां बंद होने पर व्यापारियों ने खुद नालियों से कूड़ा हटाया। 
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बारिश के साथ थमी जंगलों में आग लगने की घटनाएं 

बारिश के कारण तापमान में आई गिरावट से जंगलों की आग भी काफी हद तक नियंत्रण में आ गई है जिससे वन और अग्निशमन विभाग के कर्मचारियों को कुछ राहत मिली है।

बता दें कि बीते कुछ दिनों से जिले का तापमान 35 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच रहा था जिससे चिन्यालीसौड़, डुंडा, बड़कोट व पुरोला क्षेत्र के जंगलों में लगातार आग लगने की घटनाएं हो रही थीं। आलम यह रहा कि बीते पांच दिनों के भीतर ही आग लगने की करीब तीन दर्जन से अधिक घटनाओं में जिले का लगभग 60 हेक्टयेर वन क्षेत्र प्रभावित हो गया।
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