मौसम विज्ञान से जुड़ा चेन्नई का तकनीकी संस्थान ग्लोबल इंस्टीट्यूट आफ क्लाइमेट टेक्नोलॉजी (जीआईसीटी ) उत्तराखंड को 2013 जैसी प्राकृतिक आपदा से बचाने और इससे निपटने के लिए अपना योगदान देना चाहता है। इसके लिए संस्थान के निदेशक ने मुख्यमंत्री हरीश रावत को पत्र भेजकर प्रस्ताव दिया है।
संस्थान निदेशक और मौसम विज्ञानी डॉ. वेदगिरी गणेशन का दावा है कि उनके पास ऐसी वैज्ञानिक तकनीकें हैं जिससे बादल फटने जैसी घटना को न सिर्फ रोका जा सकता है तो वरन झीलों को फटने से भी बचाया जा सकता है। डॉ. गणेशन का दावा है कि वैज्ञानिकों के पास ऐसी तकनीक है कि जहां चाहे बारिश करा सकते हैं और जब चाहे तो बारिश को रोक सकते हैं।
डॉ. गणेशन के दावों के मुताबिक जलवायु परिवर्तन की मार झेल रहे देशों श्रीलंका, सिंगापुर या फिर मालद्वीव जैसे देशों ने उनके संस्थान की मदद ली है।
डॉ. गणेशन और उनके वैज्ञानिकों की टीम ने राजस्थान के सूखाग्रस्त इलाकों में बारिश कराने का जिम्मा उठाने का दावा करते हुए मुख्यमंत्री व सरकार के आला अफसरों से संपर्क साधा है। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने आपदा प्रबंध विभाग के आला अफसरों को इस संबंध में अध्ययन करने की बात कही है।